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गोपालन के लिए रोजाना प्रति गाय 20 रुपये का अनुदान दे रही मध्य प्रदेश सरकार!
आगर-मालवा के सुसनेर में 400 एकड़ क्षेत्र में कामधेनु अभयारण्य विकसित, की जा रही है 3400 बेसहारा, वृद्ध और बीमार गायों की देखभाल:- 👉🏻मध्य प्रदेश सरकार ने दावा किया है कि पिछले वित्त वर्ष में रोजाना औसतन 9 लाख 13 हजार किलो लीटर दूध का कलेक्शन किया गया है जबकि औसत 6 लाख 38 हजार लीटर पैकेट दूध की बिक्री हुई है. लॉकडाउन के दौरान दुग्ध संघों द्वारा 2 करोड़ 54 लाख लीटर अतिरिक्त दूध खरीदा गया. किसानों को 94 करोड़ रुपये राशि का अतिरिक्त भुगतान किया गया. प्रदेश में लगभग सवा 7 हजार दुग्ध सहकारी समितियां कार्यरत हैं। 👉🏻प्रदेश में मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना और अशासकीय स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित 1768 गौ-शालाओं में 2.5 लाख से ज्यादा गौ-वंश की देखभाल की जा रही है. सरकार प्रति गौवंश प्रति दिन 20 रुपये का अनुदान दे रही है. मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना में अब तक पूर्ण 1141 गौ-शालाओं में 76 हजार 941 गौ-वंश का पालन किया जा रहा है. स्वयंसेवी संस्थाओं की पंजीकृत 627 गौ-शालाओं में भी करीब एक लाख 74 हजार गौ-वंश की देखभाल की जा रही है। 👉🏻विकसित होंगे गौवंश वन्य विहार :- राज्य सरकार ने बताया कि गौ-वंश को जंगल से आहार और वन को गोबर से खाद मिलने की व्यवस्था प्राकृतिक है. गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड द्वारा जंगलों के पास गौ-वंश वन्य विहार विकसित किए जा रहे हैं. रीवा जिले के बसावन मामा क्षेत्र में 51 एकड़ क्षेत्र में गौ-वंश वन्य विहार विकसित किया गया है, जिसमें 4 हजार गौ-वंश हैं। 👉🏻कामधेनु पीठ की स्थापना :- जबलपुर जिले के गंगईवीर में 10 हजार और दमोह जिले में 4 हजार गौ-वंश की क्षमता वाला वन्य विहार विकसित किया जा रहा है. आगर-मालवा के सुसनेर में 400 एकड़ में कामधेनु अभयारण्य विकसित किया गया है, जिसमें वर्तमान में 3400 बेसहारा, वृद्ध और बीमार गायों की देखभाल की जा रही है. इसी माह सागर विश्वविद्यालय में कामधेनु पीठ की स्थापना भी की गई है। 👉🏻मध्यप्रदेश में गौ हत्या संज्ञेय अपराध :- मध्य प्रदेश में गौ हत्या संज्ञेय अपराध है. यहां आरोप सिद्ध होने पर सजा का प्रावधान है. मध्य प्रदेश में चार प्रजाति का देशी गौ-वंश पाया जाता है, जिनका दूध गिर गाय की तरह ही स्वर्णयुक्त एवं उच्च गुणवत्ता वाला है. देशी गाय के दूध में मानव स्वास्थ्य के लिए आवश्यक कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। 👉🏻आइसक्रीम, पनीर आदि संयंत्रों का निर्माण :- पिछले एक साल में इंदौर में 4 करोड़ रुपये की लागत से आइसक्रीम संयंत्र और खण्डवा में 25 हजार लीटर क्षमता के संयंत्र निर्माण का कार्य पूरा हुआ. जबलपुर में पौने 10 करोड़ रुपये की लागत से 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के स्वचलित पनीर निर्माण संयंत्र की स्थापना का काम भी पूरा हो चुका है. सागर में भी एक लाख लीटर क्षमता के संयंत्र की स्थापना की गई। 👉🏻बकरी दूध की बिक्री शुरू :- जन जातीय गौरव दिवस 15 नवम्बर से प्रदेश में ग्राहकों को बकरी का दूध भी मिलना आरंभ हो गया है. बकरी दूध विक्रय की शुरूआत जनजातीय बहुल जिलों सिवनी, बालाघाट और धार, झाबुआ और बड़वानी जिलों में उत्पादित 50 से 70 रुपये प्रतिकिलो की दर से खरीदे गए दूध से की गई है. उच्च गुणवत्ता वाला पौष्टिक बकरी का दूध फिलहाल जबलपुर और इंदौर संघ के पार्लर पर उपलब्ध है। स्रोत:- TV-9 👉🏻किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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