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एग्री डॉक्टर सलाहएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
गन्ने में खाद एवं उर्वरक प्रबंधन!
👉🏻गन्ना की अच्छी बढ़वार एवं उपज के लिए खाद एवं उर्वरको का उपयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए। सामान्तया गन्ने में फसल के पकने की अवधि लम्बी होने कारण खाद एवं उर्वरक की आवश्यकता भी अधिक होती है अतः खेत की अंतिम जुताई से पूर्व 100 क्विंटल सड़ी गोबर/कम्पोस्ट खाद प्रति एकर खेत में समान रूप से मिलाना चाहिए इसके अतिरिक्त 50 कि.ग्रा. यूरिया, 200 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट एवं 40 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकर बुआई के पूर्व खेत मे मिलाये या डीएपी 80 किलोग्राम प्रति एकर एवं म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलोग्राम प्रति एकर बुआई के पूर्व खेत मे मिलाये । इसके साथ ही 10 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट व 20 कि.ग्रा. फेरस सल्फेट प्रति एकर जिंक व आयरन सूक्ष्म तत्व की पूर्ति के लिए आधार खाद के रूप में बुवाई के समय खेत मे समान रूप से भुरककर खेत मे मिला देवें। यूरिया की मात्रा को निम्नानुसार प्रयोग करें। 👉🏻शरदकालीन गन्नाः- शरदकालीन गन्ने में 200 किलोग्राम यूरिया प्रति एकर चार समान भागों में बांटकर कर बोनी के क्रमशः 45, 90, 120 एवं 150 दिन में प्रयोग करें। 👉🏻बसन्तकालीन गन्नाः- बसन्तकालीन गन्ने में 200 किलोग्राम यूरिया प्रति एकर तीन समान भागों में बाँटकर कर बोनी क्रमशः 45, 90 एवं 120 दिन में प्रयोग करें। स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, यदि आपको आज के सुझाव में दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद।
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