कृषि वार्ताकृषि जागरण
खेती को रसायन मुक्त करने के लिए जैविक मित्र कीटों का पालन
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायुपर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने जैविक खेती को नुकसान पहुंचाने वाले शत्रु कीट को मारने के लिए जैविक कीट मित्रों को पालना शुरू कर दिया है। यह सभी कीट धान, तिलहन, दलहन, सब्जी, भाजी आदि के लिए पौधों को खाने और नष्ट करने वाले कीटों को खाते है या उनको नष्ट कर देते है।
इससे किसानों को कीटनाशक का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं करना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि जैविक खेती में प्रयोग के तौर पर रासायनिक खाद और कीटनाशक डालने के बजाय इन कीटों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में उनकी भूमि से पौष्टिक तत्वों के क्षरण तो रूक रहा है साथ ही हानिकारक शत्रु कीट भी फसल को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचा पा रहे है। कृषि विवि के जैविक कीट विज्ञान विभाग के नेतृत्व में शत्रु कीटों को नष्ट करने के लिए मित्र कीटों का संवर्धन किया जा रहा है। इसके सहारे पर्यावरण को भी फायदा हो रहा है। स्रोत – कृषि जागरण, 20 नवंबर 2019 यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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