केसर की खेती की पूरी जानकारी!
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केसर की खेती की पूरी जानकारी!
👉केसर एक फूल वाला पौधा है और दुनिया के सबसे महंगे मसालों में से एक है और सबसे महंगा मसाला होते हुए भी यह दुनिया में कहीं भी उग सकता है. भारत में केसर की खेती मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में की जाती है, लेकिन अब किसान अपने प्रयोग से इसको उत्तर प्रदेश और राजस्थान (राजस्थान) जैसे राज्यों में भी उगा रहें है. अब ऐसे में बहुत से किसानों का यह सवाल होता है कि इसकी खेती कैसे की जाती है, तो आइये जानते हैं. केसर की खेती की रोपण तकनीक भी भिन्न हो सकती है, जो कि जलवायु, मिट्टी के प्रकार, रोपण की गहराई और कॉर्म की दूरी के आधार पर भिन्न हो सकती है. 👉जलवायु :- केसर को उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाने के लिए सर्वोत्तम जलवायु चाहिए होती है. यह इसमें सबसे अच्छा बढ़ता है जहां इसे हर दिन कम से कम 12 घंटे सीधी धूप मिलती है. 👉मिट्टी :- केसर की खेती अत्यधिक मिट्टी के प्रकार पर आधारित होती है. और यह दोमट और रेतीली मिट्टी इसके उचित वृद्धि के लिए सर्वोत्तम हैं. केसर की खेती के लिए मिट्टी का पीएच स्तर 6 से 8 होना चाहिए. बता दें कि केसर भारी, चिकनी मिट्टी में नहीं उग सकता है. 👉ऋतु :- केसर की खेती के लिए जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने सबसे अच्छा माना जाता है. पौधा अक्टूबर में फूलना शुरू कर देता है और इसको गर्मियों में गर्मी के साथ सूखापन और सर्दियों के दौरान अत्यधिक ठंड की आवश्यकता होती है. 👉पानी :- केसर के पौधे को ज्यादा गीली मिट्टी की जरूरत नहीं होती है इसलिए इसे कम पानी की आवश्यकता होती है. यदि हम संख्या के अनुसार देखें तो केसर की खेती के दौरान प्रति एकड़ लगभग 283 घन मीटर पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए. 👉केसर की कटाई :- उच्च देखभाल के अलावा, केसर इतना महंगा होने का मुख्य कारण यह है कि यह केसर की कटाई के लिए श्रमसाध्य और समय लेने वाला होता है. फूलों की कटाई भोर में करनी चाहिए, क्योंकि फूल भोर में खिलते हैं और दिन बढ़ने पर मुरझा जाते हैं. केसर की कटाई के बारे में अधिक विशिष्ट होने के लिए, केसर के फूलों को सूर्योदय से सुबह 10 बजे के बीच तोड़ना चाहिए. 👉स्त्रोत:-Agrostar किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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