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कृषि विवि में मिलेगा ड्रैगन फ्रूट की खेती का प्रशिक्षण!
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कृषि विवि में मिलेगा ड्रैगन फ्रूट की खेती का प्रशिक्षण!
👉नमस्कार किसान भाइयों आज मै आपलोगों के लिए खेती में कुछ नया करने को सोचते रहते है उनके लिए आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय में किसानों को खेती-बारी की आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाता है। कम लागत की खेती से अधिक उत्पादन लेने व लाभ कमाने का तरीका बताया जाता है, लेकिन अब विवि प्रशासन किसानों को पौष्टिक क्षमता से भरपूर ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के लिए प्रशिक्षित करने की तैयारी कर रहा है। फल विभाग के विभागाध्यक्ष डा. संजय पाठक की अगुवाई में किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गत वर्ष ही लाकर इसे विवि में रोपा गया था। अब शोध कार्य शुरू हो चुका है। इन दिनों किसानों को व्यक्तिगत रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है, आगे समूह में प्रशिक्षित करने की योजना है। इसके अंतर्गत किसानों को विवि के ड्रैगन परिक्षेत्र का भ्रमण करा कर इसकी खेती का तरीका बताया जाएगा। डा. पाठक ने बताया कि यह फ्रूट बहुत उपयोगी है। 👉किसान इसकी खेती कर अधिक लाभ कमा सकेंगे। इसकी खेती कम क्षेत्रफल में शुरू हो सकती है और अधिक आय प्राप्त करने का अच्छा माध्यम है। कहा कि इसकी खेती का प्रचलन बढ़ाने की जरूरत है। इसी को देखते हुए किसानों को प्रशिक्षित करने की योजना है। डा. पाठक के निर्देशन में शोध छात्र लवकुश इस फ्रूट के पोषक तत्व प्रबंधन पर कार्य कर रहे हैं। मैक्सिको का ड्रैगन फ्रूट अवध की माटी में जमाएगा रंग:- 👉अयोध्या: शोधार्थी लवकुश के अनुसार यह पौधा मूल रूप से मैक्सिको का है, जो वियतनाम, इजरायल, इंडोनेशिया, मलेशिया व श्रीलंका में पंसद किया जाता है। यह भारत में नई फसल के रूप में प्रतिष्ठित हुआ है। इसकी खेती गुजरात व महाराष्ट्र में होती है, लेकिन यूपी सहित कई राज्यों में अब इसे व्यावसायिक स्तर पर शुरू किया गया है। इस पौधे में औषधीय गुण होते हैं। यह एंटी आक्सीडेंट से भरपूर होता है। नियमित रूप से इस फल का सेवन करने से अस्थमा, खांसी, कोलेस्ट्राल, उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें विटामिन सी व फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है। यह फल हृदय संबंधित विकारों को दूर करने एवं भोजन को सुपाच्य बनाने में भी सहायक होता है। इसमें फास्फोरस व कैल्शियम की मात्रा अच्छी होती है। इसके सेवन से हड्डियां मजबूत होती है। इसे लगाने का समय फरवरी व मार्च में होता है। यह मौसम में तीन से चार बार फल देता है। स्रोत:- Agrostar 👉किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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