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कृषि विभाग ने जारी किए निर्देश!
➡️अधिक तापमान होने के कारण अगेती बुवाई किए गये कपास की फसल में गुलाबी सुंडी की प्रजनन क्षमता काफी ज्यादा देखने को मिलती है। राजस्थान के “गंगानगर” जिले में गुलाबी सुंडी और रस चूषक कीट का प्रकोप तेजी से देखने को मिल रहा है। 👉🏻जानें क्या होती है गुलाबी सुंडी और उसके लक्षण :- ➡️यह कीट फूल से टिंडे में चली जाती है। टिंडे के अंदर बिनौले का रस चूसती है। जिससे कपास की क्वालिटी व उत्पादन प्रभावित होता है। ➡️गुलाबी सुंडी एक कीट होता है। इसका एक वैज्ञानिक नाम “पेक्टिनोफोरा गोंसीपीला” है। ये अपने जीवनकाल के दौरान अलग-अलग प्रकार के चार अवस्थाओं से गुजरता है। सामान्य रूप से फल में कलियां व फूल आने के बाद ही इस कीट का उपद्रव शुरू होता है। कई बार कीटग्रस्त फूलों की पंखुड़ियां आपस में मिल जाती है। यह दूर से देखने पर गुलाब की पंखुड़ी की तरह ही दिखाई देती है। अंडे में निकली छोटी- छोटी सुंडियां फूल व छोटे बोल्स में सूक्ष्म छिद्र बनाकर उनके अंदर आसानी से प्रवेश कर जाती है। इससे फूल व टिंडे गिर जाते है। इससे फसलों को सीधा नुकसान भी होता है। 👉🏻बचाव :- ● कपास की जो अगेती कपास की फसल है, उसमें लगे टिंडे और फूल को तोड़कर दबा दें। ● कपास के खेत मे कीट निगरानी हेतु फेरोमेन ट्रैप लगायें। ● कपास की फसल में सुरुवाती अवस्था में रस चूषक कीट के लिए एग्रोस्टार का किल एक्स दवा का 60 से 80 मिली प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी मे मिलाकर छिड़काव करे। ● उसके बाद रासायनिक नियंत्रण के लिए एग्रोस्टार का हेलिओक्स,दवा का 400 से 600 मिली प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी मे मिलाकर छिड़काव करे। ● गुलाबी इल्ली के जीवन चक्र को रोकने के लिए फसल के चक्रीकरण का अनुसरण करे। ● फसल में अधिक प्रकोप दिखने पर एक सप्ताह के अंतराल में दो से तीन बार छिड़काव करें। 👉🏻स्त्रोत:- Agrostar, किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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