किसान करें इन फसलों की खेती हाथों-हाथ बिक जाती है उपज!
समाचारदैनिक भास्कर
किसान करें इन फसलों की खेती हाथों-हाथ बिक जाती है उपज!
👉🏻औषधीय खेती किसानों की आय दोगुना कर सकती है। जबलपुर समेत आस पास के जिलों में स्टीविया, कोलियस (पाषाण भेदन), गुग्गल, अश्वगंधा जैसी औषधीय फसलों की खेती से अच्छी आय किसान को हो सकती है। स्टीविया जहां प्रति एकड़ 10 से 15 क्विंटल होता है। वहीं, कोलियस की साल में दो बार खेती की जा सकती है। कोलियस की जड़ 350 से 600 रुपए कीमत पर बिकती है। वहीं, स्टीविया 80 से 140 रुपए किलो की दर से बिकती है। किसान किस तरह से औषधीय फसलों की खेती करें। जानते हैं भास्कर खेती-किसानी सीरीज-33 में एक्सपर्ट अम्बिका पटेल (प्रगतिशील किसान) से… 👉🏻प्रगतिशील किसान का नेशनल अवार्ड पा चुके हैं - इनोवेटिव प्रोगाम के रूप में भारत सरकार ने उनका चयन किया था। एक सितंबर 2021 को इसके लिए वे सम्मानित भी हो चुके हैं। उनके 25 एकड़ के फाॅर्म हाउस में जेएनकेवी के छात्रों से लेकर किसान भाई खेती के गुर सीखने आते हैं। वे अपनी औषधीय उत्पाद को प्रदेश भर में लगने वाले वन मेले व बाजार में स्टॉल के माध्यम से प्रमोट करने जाते हैं। 👉🏻17 जिले के किसानों का बनाया ग्रुप - महाकौशल व विंध्य के जिलों के अलावा धार, बड़वानी, खरगोन, हरदा, सिहोर आदि 17 जिलों में 8 से 10 किसानों का एक ग्रुप बनाया है। ये सभी किसान सफेद मूसली, अश्वगंधा, सर्पगंधा स्टीविया, हल्दी, कोलियस, शतावर आदि अलग-अलग औषधीय खेती करते हैं। उनके लिए जरूरी ट्रेनिंग और बीज से लेकर नर्सरी वे उपलब्ध कराते हैं। स्टार्टअप के माध्यम से किसानों के उत्पादित जैविक उत्पाद को जैविक प्रमाणीकरण करते हुए पाउडर बनाकर बेचते हैं। इससे किसानों के साथ हमें भी फायदा हो रहा है। 👉🏻कोलियस की खेती ऐसे करें - कोलियस को पाषाण भेदन भी कहते हैं। इसकी जड़ बहुत सेंटेड होती है। इसका आयुर्वेद में बड़ा उपयोग है। ये ब्लड को पतला करता है। बीपी के मरीजों के उपयोग के लिए दवाएं तैयार होती हैं। एक एकड़ में 6 से 8 क्विंटल उपज होती है। बाजार में 350 से 600 रुपए किलो की दर से बिकती है। सिंचाई का साधन होने पर इसकी खेती कभी भी कर सकते हैं। 👉🏻फरवरी व जून में कर सकते हैं बुवाई - किसान भाई फरवरी में इसे रोप सकते हैं। जून-जुलाई में ये तैयार हो जाएगा। इसके बाद जून में इसकी बुवाई कर दे, जो अक्टूबर-नवंबर तक तैयार हो जाएगा। ठंड में पाला से ये नष्ट हो जाता है। इस कारण ठंड में इसे पॉली हाउस में उगाना चाहिए। बीज के रूप में फिर इसकी बुआई फरवरी में करना चाहिए। पौधों से पौधों की दूरी 8 इंच और क्यारी की दूरी दो फीट रखते हैं। प्रति एकड़ 8 टन वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने पर अधिक उत्पादन मिल सकता है। 👉🏻एक बार लगाएं, चार साल तक होगी कमाई - स्टीविया इसे मीठी तुलसी भी कहते हैं। मैने तीन एकड़ में इसे लगाया है। इसे भी वर्ष में कभी भी रोप सकते हैं। ये ठंडल के रूप में लगाया जाता है। पौधों से पौधों की दूरी 6 से 8 इंच और क्यारी की दूरी दो फीट रखनी चाहिए। रोपने के 45 दिन बाद इसमें फूल आते हैं। उसे काट कर अलग कर लेना चाहिए। इसके 45 दिन बाद तने को नीचे से काट लेना चाहिए। तीन दिन छाए में सुखाने पर इसकी पत्तियां अलग हो जाती हैं। 90 दिन पर कटाई करने से पत्तियां हरी रहेंगी और मिठास भी अधिक मिलेगा। इससे कम दिन पर कटाई करने से पत्तियां काली व कम मीठी होती है। 👉🏻एक एकड़ में 10 क्विंटल उपज - एक एकड़ में 25 हजार पौधे लगते हैं। स्टीविया का पौधा एक बार रोपने पर चार साल तक चलता है। पहले साल तीन कटाई। दूसरे साल से चार कटाई होती है। प्रति एकड़ 8 से 10 क्विंटल पत्तियां मिलती हैं। बाजार में इसका मूल्य 80 से 140 रुपए है। ये कैलोरी रहित होती है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छा होता है। वर्मी कम्पोस्ट प्रति एकड़ दो टन डालना चाहिए। अधिक उत्पाद के लिए 8 टन भी डाल सकते हैं। रसायनिक खाद से इसका उत्पादन 25 क्विंटल तक हो सकता है। 👉🏻गुग्गल की खेती - किसान गुग्गल की खेती भी कर सकते हैं। इसके तने में चीरा लगा कर गोंद प्राप्त करते हैं। इसका हवन के साथ शक्तिवर्धक दवाओं में उपयोग होता है। किसान खेत के चारों ओर इसे लगा सकते हैं। ये कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करता है। इसके पौधे चार से पांच फीट के होते हैं। गुग्गल के कई औषधीय गुण होने के चलते इसकी काफी मांग रहती है। ये मोटापा से भी निजात दिलाता है।एक एकड़ में दो हजार पौधे लगते हैं। प्रति पौधा 800 ग्राम गुग्गल प्राप्त होता है। पांच साल में इसका पौधा तैयार हाे जाता है। बाजार में एक किलो गुग्गल की कीमत 250 रुपए है। स्रोत:- Dainik bhaskar, 👉🏻किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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