किसानों की हो जाएगा उत्पादन दोगुना!
कृषि वार्ताAgrostar
किसानों की हो जाएगा उत्पादन दोगुना!
👉यदि खेत में कोई विषाणु रोग से प्रभावित पौधे दिखाई दें तो उसे तुरंत हटा दें और नष्ट कर दें. साथ ही विषाणु फैलाने वाले कीट वाहकों को मारने के लिए किसी भी प्रणालीगत कीटनाशक का छिड़काव करें. 👉 उत्तर भारत में ऊतक संवर्धन पद्धति द्वारा केले की खेती की जाती है. खास कर इस पद्धित के तहत खेती करने करने वाले किसान जून, जुलाई और अगस्त महीने में केले के पौधों की रोपाई करते हैं. ऐसे में जो पौधे जून, जुलाई और अगस्त महीने में लगाए गए थे, वे अब क्रमश: 60 दिन, 90 दिन और 120 दिन के हो गए होंगे. साथ ही मौसम में बदलाव भी हो गया है. अब बरसात से सर्दी का मौसम आ गया है. ऐसे में केले के पौधों में बीमारी लगने की संभावना बढ़ गई है. इसलिए अक्टूबर से दिसंबर महीने तक किसानों को विशेष सावधानी के साथ फसलों की देखभाल करने की जरूरत है. 👉देश के वरिष्ठ फल वैज्ञानिक डॉक्टर एसके सिंह केले की व्यावसायिक खेती करने वाले किसानों को फसलों की देखभाल करने के लिए टिप्स दे रहे हैं. डॉक्टर एसके सिंह के मुताबिक, केले की खेती करने वाले किसान इस समय सबसे अधिक कृमि से परेशान रहते हैं. ऐसे में कृमि को नियंत्रित करने के लिए 40 ग्राम कार्बोफ्यूरॉन प्रति पौधे की दर से प्रयोग करें. फिर, गुड़ाई और निराई करने के बाद उर्वरकों की पहली खुराक के रूप में यूरिया 100 ग्राम, सुपर फॉस्फेट 300 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश ( एमओपी ) 100 ग्राम प्रति पौधा लगभग 30 सेमी दूर बेसिन में डालें. 👉उर्वरकों के प्रयोग के बीच कम से कम 2-3 सप्ताह का अंतर होना चाहिए। 👉यदि आपके केले के पौधें चार महीने के हो गए हैं तो उसमे एज़ोस्पिरिलम व फॉस्फोबैक्टीरिया 30 ग्राम, ट्राइकोडर्मा विराइड 30 ग्राम और 5-10 किलोग्राम खूब सड़ी कंपोस्ट की खाद प्रति पौधे की दर से प्रयोग करें. रासायनिक उर्वरकों और जैव उर्वरकों के प्रयोग के बीच कम से कम 2-3 सप्ताह का अंतर होना चाहिए. साथ ही मुख्य पौधे के बगल में निकल रहे पौधों को जमीन की सतह से ऊपर काटकर समय-समय पर हटाते रहना चाहिए. 👉प्रति पौधा 50 ग्राम कृषि चूना और 25 ग्राम मैग्नीशियम सल्फेट का प्रयोग करें। 👉कीट वाहकों को नियंत्रित करने के लिए प्रणालीगत कीटनाशकों का छिड़काव करें। अंडे देने और स्टेम वीविल के आगे हमले को रोकने के लिए, ‘नीमोसोल’ 12.5 मिली प्रति लीटर या क्लोरपाइरीफास 2.5 मिली प्रति लीटर को तने पर स्प्रे करें. कॉर्म और स्टेम वीविल की निगरानी के लिए, 2 फीट लंबे अनुदैर्ध्य स्टेम ट्रैप 40 ट्रैप प्रति एकड़ को विभिन्न स्थानों पर रखा जा सकता है. एकत्रित घुन को मिट्टी के तेल से मार देना चाहिए. केले के खेतों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों को खरपतवार मुक्त रखें और कीट वाहकों को नियंत्रित करने के लिए प्रणालीगत कीटनाशकों का छिड़काव करें. 👉स्त्रोत:-Agrostar किसान भाइयों ये जानकारी आपको कैसी लगी? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं और लाइक एवं शेयर करें धन्यवाद!
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