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एक एकड़ से लाखो रुपए की कमाई,जानें इस फसल की विस्तृत जानकारी !
अगर आप मेहनत और लगन से काम करते हैं तो सफलता निश्चित है. यहीं कारण है कि किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं. अगर आप भी पारंपरिक फसलों से हटकर कुछ करना चाहते हैं तो आपके पास शतावरी के रूप में एक शानदार विकल्प है. शतावरी एक औषधीय पौधा है और इसकी जड़ और पत्ते का इस्तेमाल अलग-अलग तरह की आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में होता है. मांग के मुताबिक उत्पादन नहीं होने से खेती करने वाले किसान अच्छा भाव पा जाते हैं. कैसे होती है शतावरी की खेती? शतावरी की खेती करने के लिए सबसे पहले नर्सरी में पौध तैयार करनी पड़ती है. एक हेक्टेयर में शतावरी की खेती करने के लिए कम से कम 12 किलो बीज की जरूरत होती है. नर्सरी तैयार करने में विशेष ध्यान देना पड़ता है और खेत की अच्छी से जुताई करा कर मिट्टी भुरभुरी बना दी जाती है. जहां आप नर्सरी डाल रहे हैं, खेत का वह हिस्सा पूरी तरह साफ होना चाहिए. उसमें फसल अवशेष या कोई खर-पतवार रह जाता है तो पौध प्रभावित होती है. नर्सरी में पौध तैयार हो जाने के बाद इसे पहले से तैयार खेत में रोपा जाता है. रोपाई मेड़ों पर की जाती है. रोपते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पौधे समान दूरी पर हों. कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि अच्छी जल निकासी वाली जमीन में ही शतावरी की खेती करनी चाहिए. दरअसल, यह जड़ वाला पौधा है. ज्यादा समय तक खेत में पानी जमा रहे तो फसल प्रभावित हो जाती है. रोपाई के करीब 12 से 14 महीने में जड़े तैयार हो जाती हैं. एक पौधे से 500 ग्राम से अधिक जड़ प्राप्त होती है. खेत से लाने के बाद जड़ों को सूखाना पड़ता है. सूखने के बाद इनका वजन कम हो जाता है. किसान बताते हैं कि एक हेक्टेयर खेत में करीब 12 से 14 क्विंटल तक सूखी जड़े प्राप्त हो जाती हैं. किसान इन्हें मंडियों में ले जाकर बेच सकते हैं. आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली कुछ कंपनियां किसानों से सीधे खरीद कर लेती हैं. स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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