एग्री डॉक्टर सलाहकिसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग मध्य प्रदेश
ईसबगोल के लिए जलवायु, भूमि एवं भूमि की तैयारी!
ईसबगोल के लिए ठंडी एवं शुष्क जलवायु उपयुक्त हैं। फसल पकते समय वर्षा व ओस का होना फसल के लिए बहुत ही हानिकारक होता हैं। कभी कभी फसल बारिश से 100 प्रतिशत तक नष्ट हो जाती हैं। अधिक आद्रता एवं नमीयुक्त जलवायु में इसकी खेती नहीं करना चाहिए। इसके अंकुरण के लिए 20-25 डिग्री सेल्सियस तथा फसल की परिपक्वता के समय 30-35 डिग्री सेल्सियस तापक्रम उपयुक्त हैं। इसके लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट भूमि उपयुक्त हैं। भूमि की पी-एच मान 7-8 तक होना चाहिए।दो बार आडी खडी जुताई एवं एक बार बखर चलावें तथा पाटा चलाकर मिट्टी भुरभुरी एवं समतल कर लें। छोटी क्यारियां बना लें। क्यारियों की लम्बाई चौड़ाई खेत के ढलान एवं सिंचाई की सुविधानुसार रखें। क्यारियों की लम्बाई 8-12 मीटर व चौड़ाई 3 मीटर से अधिक रखना उचित नहीं होता हैं। खेत में जल निकास का प्रबंध अच्छा होना चाहिए। क्योंकि खेत में पानी का भराव ईसबगोल के पौधे सहन नहीं कर सकते हैं।
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स्रोत:- किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग मध्य प्रदेश,
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