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इस पौधे की खेती कर एक एकड़ में कमाए चार लाख रूपए!
👉🏻 किसानों के लिए आज के समय में एक से एक विकल्प मौजूद हैं. इनके सहारे वे अपनी आय बढ़ा रहे हैं और अन्य किसानों को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं. इस दौर में औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए एक शानदार विकल्प के रूप में उभरी है. सबसे अच्छी बात यह होती है कि इन पौधों की खेती में लागत काफी कम आता है, जिससे मुनाफा ज्यादा होता है. दवाई बनाने में इस्तेमाल के कारण इनकी मांग हमेशा बनी रहती है. 👉🏻 इसी तरह का एक औषधीय पौधा है सर्पगंधा. इसे एशिया महाद्वीप का पौधा माना जाता है. अपने देश में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर हो रही है. विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में 400 वर्ष से सर्पगंधा की खेती किसी न किसी रूप में हो रही है. पागलपन और उन्माद जैसी बीमारियों के निदान में इसका उपयोग किया जाता है. सांप और अन्य कीड़े के काटने पर भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. जलभराव वाले क्षेत्र में नहीं होती खेती 👉🏻 सर्पगंधा एक औषधीय पौधा है. इसकी जड़े मिट्टी में गहराई तक जाती है. यह खुले क्षेत्रों में ज्यादा पनपता है. ठंड के मौसम में इसके पत्ते झड़ जाते हैं लेकिन जैसे ही बसंत का मौसम आता है. नए पत्ते पनपने लगते हैं. जलभराव वाले क्षेत्रों में इसकी खेती नहीं होती. हालांकि कुछ दिन तक जलभराव हो तो इसकी फसल पर कोई असर नहीं पड़ता है. कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि 250 से 500 सेंटी मीटर तक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में अच्छी प्रकार से उगता और बढ़ता है. तीन प्रकार से की जाती है बुवाई 👉🏻 रेतीली दोमट और काली कपासिया मिट्टी इसकी खेती के लिए ज्यादा उपयुक्त है. इसकी तीन प्रकार से खेती की जाती है. तने से कल बनाकर खेती करने के लिए कलमों को 30 पीपीएम वाले एन्डोल एसिटिक एसिड वाले घोल में 12 घंटें तक डुबोकर रखने के बाद बुवाई करने से पैदावार अच्छी होती है. 👉🏻 दूसरी विधि में इसकी जड़ों से बुवाई की जाती है. जड़ों को मिट्टी और रेत मिलाकर पॉलीथीन की थैलियों में इस प्रकार रखा जाता है कि पूरी कटिंग मिट्टी से दब जाए तथा यह मिट्टी से मात्र 1 सेंटी मीटर ऊपर रहे. जड़े एक माह के अंदर अंकुरित हो जाती हैं. इस विधि से बुवाई करने के लिए एक एकड़ में लगभग 40 किलोग्राम रूट कटिंग की आवश्यकता होती है. 👉🏻 तीसरा तरीका है बीजो से बुवाई का. इसे ही सबसे बेहतर माना जाता है. लेकिन इसके लिए अच्छे गुणवत्ता वाले बीजों का चयन बहुत जरूरी है. पुराने बीज ज्यादा उग नहीं पाते, इसलिए नए बीज से बुवाई की सलाह दी जाती है. नर्सरी में जब पौधे में 4 से 6 पत्ते आ जाएं तो उन्हें पहले से तैयार खेत में लगा दिया जाता है. सर्पगंधा के पौधों को एक बार बोने के बाद दो वर्ष तक खेत में रखा जाता है. इसलिए खेत को अच्छे से तैयार करना चाहिए. खेत में जैविक खाद मिला देने से फसल की बढ़वार अच्छी होती है. पहली बार फूल आने पर तोड़ दिया जाता है 👉🏻 खेत तैयार हो जाने के बाद 45-45 सेंटी मीटर की दूरी पर 15 सेंटी मीटर गहरे कुंड बना दिए जाते हैं. इन्हीं में पौधों को रोपा जाता है. 6 महीने बाद पौधों में फूल आने लगते हैं, जिन पर फल और बीज बनते हैं. पौधे में पहली बार आने वाली फूलों को तोड़ दिया जाता है. ऐसा न करने पर फूल में बीज बनने लगते हैं और जड़े कमजोर पड़ जाती हैं. एक बार बुवाई करने पर 30 माह तक खेत में रहता है पौधा 👉🏻 इसके बाद फूल आने पर फल और बीज बनने के लिए छोड़ दिया जाता है. सप्ताह में दो बार तैयार बीजों को चुना जाता है. यह सिलसिसा पौध उखाड़ने तक जारी रहता है. अच्छी जड़े प्राप्त करने के लिए कुछ किसान 4 साल तक पौधे को खेत में रखते हैं. हालांकि कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि 30 माह का समय सबसे उपयुक्त होता है. सर्पगंधा के बीज की प्रति किलो कीमत 3 हजार रुपए 👉🏻 30 माह बाद सर्दी के मौसम में जब पत्ते झड़ जाते हैं तब पौधों को जड़ सहित उखाड़ लिया जाता है. जड़ों को साफ कर अच्छे से सूखा लिया जाता है. फिर किसान इसे बाजार में बेच सकते हैं. किसान बताते हैं कि पत्ते से भी दवाइयां बनती हैं. वहीं एक एकड़ में 30 किलो तक बीज निकलता है, जिसकी बाजार में कीमत प्रति किलो 3 हजार रुपए है. एक एकड़ में सर्पगंधा की खेती करने पर 4 लाख रुपए तक का लाभ होता है. 👉🏻 खेती तथा खेती सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए कृषि ज्ञान को फॉलो करें। फॉलो करने के लिए अभी ulink://android.agrostar.in/publicProfile?userId=558020 क्लिक करें। स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉🏻 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। यदि दी गई जानकारी आपको उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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