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इस गांव में कोई बेरोज़गार नहीं, ऐसे बदल ली खुद की तकदीर!
👉🏻कोरोनाकाल में मेरठ के एक गांव ने मिसाल पेश की है. इस गांव में कोई बेरोजगार नहीं है. सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर मेरठ के इस गांव के लोगों ने अपनी तकदीर खुद लिखी है. कोरोनाकाल के दौरान भी यहां काम चलता रहा. मशीनों की खटखट की आवाज आती रही और जैसे ही कर्फ्यू में ढील दी गई, काम ने फिर रफ्तार पकड़ ली। हर घर में फुटबॉल का कोई न कोई पार्ट बनता है:- 👉🏻ये कहानी है मेरठ से तकरीबन चालीस किलोमीटर दूर सिसौला कला गांव की. यहां तकरीबन 3800 घर हैं और इस गांव में कोई युवा बेरोजगार नहीं है. यहां हर हाथ को काम है. फुटबॉल बनाकर इस गांव के लोग बेरोजगारी को किक मार रहे हैं. इस गांव को लोग फुटबॉल वाले गांव के नाम से भी जानते हैं. यहां हर घर में फुटबॉल बनाने का कोई न कोई काम होता है. किसी घर में फुटबॉल के लिए आए रॉ मटेरियल की कटाई की जाती है, तो कहीं सिलाई और फ्यूजिंग. जिला उद्योग केन्द्र के उपायुक्त डॉक्टर वीके कौशल का कहना है कि गांव के ऐसे लोगों को आने वाले दिनों में सम्मानित भी किया जाएगा, जो न सिर्फ खुद अपने पैरों पर खड़े हुए बल्कि औरों को भी रोजगार दे रहे हैं। ओडीओपी का कमाल:- 👉🏻सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना ओडीओपी को लेकर भी मेरठ ने इतिहास रचा है. क्रान्ति की नगरी ने ओडीओपी योजना को लेकर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. कौशल ने बताया कि पूरे भारत वर्ष में सिर्फ यूपी ही ऐसा राज्य है, जहां ओडीओपी योजना चल रही है. इस योजना के अंतर्गत कैसे कारीगर बेहतर तरीके से ट्रेंड होंगे, कैसे उन्नत तरीके के टूल्स पर काम करेंगे, कैसे अपने प्रॉडक्ट की मार्केटिंग करेंगे, कैसे लोन लिया जाएगा - जैसी तमाम बारीकियां सिखाई जाती हैं. जिला उद्योग केन्द्र के उपायुक्त का कहना है कि 2020-21 में ओडीओपी योजना को लेकर मेरठ ने यूपी में पहला स्थान हासिल किया है। सरकारी योजनाओं का बेहतर इस्तेमाल:- 👉🏻ओडीओपी योजना और सरकारी की अन्य योजनाओं का लाभ लेकर मेरठ के जानी ब्लॉक के सिसौला गांव ने तो मुश्किल हालात को अपने आत्मनिर्भर होने के संकल्प से चकनाचूर कर दिया है. इस गांव के लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रोल मॉडल मानते हैं. खासतौर से युवाओं का कहना है कि पीएम मोदी हमेशा आत्मनिर्भर बनने की बात करते हैं. इसीलिए उनका गांव आज से नहीं बल्कि पिछले कई वर्षों से आत्मनिर्भर है. जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त का कहना है कि कोरोनाकाल के दौरान भले ही यहां बने हुए फुटबॉल की सेल न हुई हो. लेकिन यहां काम बराबर चलता रहा और जैसे ही बाज़ार खुला उनके उत्पाद हाथों हाथ बिक गए। स्रोत:- News 18, 👉🏻 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। यदि दी गई जानकारी आपको उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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