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इस खास पौधे की खेती कर किसान कर रहे हैं मोटी कमाई!
👉🏻 आज के दौर में किसान सिर्फ पारंपरिक फसलों की खेती ही नहीं कर रहे हैं बल्कि उन फसलों को भी उगा रहे हैं, जिनसे उन्हें आर्थिक लाभ हो रहा है। इसी कारण से भारत में औषधीय पौधों की खेती का चलन बढ़ रहा है। 👉🏻 आज के दौर में किसान सिर्फ पारंपरिक फसलों की खेती ही नहीं कर रहे हैं बल्कि उन फसलों को भी उगा रहे हैं, जिनसे उन्हें आर्थिक लाभ हो रहा है। इसी कारण से भारत में औषधीय पौधों की खेती का चलन बढ़ रहा है। भारत में तरह-तरह के औषधीय पौधे पाए जाते हैं. इसी में से एक पौधा है पीपली। इसकी खेती कर किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं और आम लोगों को भी इसका फायदा मिल रहा है। सरकार भी किसानों की आय बढ़ाने के लिए इस तरह की खेती को प्रोत्साहित करती है। 👉🏻 पीपली को पीपर भी कहते हैं। पीपली के तने, जड़ और फल का इस्तेमाल विभिन्न तरह की दवाइयों के निर्माण में होता है। सर्दी, खांसी, दमा, जुकाम, अस्थमा, ब्रांकाइटिस, श्वास रोग, जीर्ण ज्वर आदि के इलाज में इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा अपच, मूत्र रोग, पीलिया, पेचिश, सूजन और पेट के अन्य रोग के इलाज में भी इससे फायदा होता है। 👉🏻 पीपली दो प्रकार की होती है. छोटी पीपली और बड़ी पीपली. औषधीय पौधों की समझ रखने वाले इस चार भाग में बांटते हैं, जिन्हें, पिप्पली, गज पिप्पली, सैंहली और वन पिप्पली कहते हैं. तमिलनाडु की अन्नामलाई पहाड़ियों से लेकर असम की चेरापूंजी आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले के पहाड़ी पर भी इसकी खेती की जाती है. एक बार लगाने पर 5-6 साल तक रहता है पौधा 👉🏻 पीपली की खेती के लिए इसकी उन्नत किस्मों, जैसे कि नानसारी चिमाथी और विश्वम का चुनाव करना जरूरी है। इसकी खेती के लिए लाल मिट्टी, बलुई दोमट और पानी निकास के लिए उपयुक्त भूमि इसके लिए अच्छी होती है। वैसे काली, मध्यम और भारी बलुई मिट्टी पर भी इसकी खेती हो सकती है। बस जल निकासी की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। 👉🏻 पीपली की खेती के लिए सिंचाई का व्यवस्था होना जरूरी है। नमी युक्त जलवायु पीपली की खेती के लिए सबसे उपयुक्त होती है। पीपली का पौधा एक बार लगाने पर 5-6 साल तक रहता है। ऐसे में लगाते वक्त खेत की जुताई अच्छे से कराना जरूरी है। इसके बाद खेत में जैविक खाद के अलावा पोटाश और फास्फोरस डालना जरूरी है। पीपली पर सीधी हवा का प्रभाव पड़ता है और छाव की भी जरूरत होती है। इसके लिए आप खेत में टटिया या बांस की चटाई लगा सकते हैं। बाजार में मिलती है अच्छी कीमत 👉🏻 फरवरी या मार्च के महीने में पौधशाला लगानी चाहिए। किसानों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह छांव में हो। पौध तैयार होने के बाद जुलाई के महीने में इनकी रोपाई की जाती है. खेत में क्यारियां बनाकर इसकी रोपाई की जाती है। रोपाई के बाद 20 दिन तक रोज सिंचाई जरूरी है। इसके बाद सप्ताह में एक बार सिंचाई करना चाहिए। खेत में खाद देने से पौधा की अच्छी बढ़वार होती है। 👉🏻 रोपाई के चार से 6 महीनों में पौधे पर फूल आने लगते हैं और दो महीने बाद ये काले पड़ने लगते हैं। पके हुए काले फलों को तोड़ने के काम चार से पांच सप्ताह में पूरा कर लेना चाहिए. तोड़े हुए फल को सूखा लेना चाहिए। अगर उपज की बात करें तो पीपली प्रति हेक्टेयर चार से 6 क्विंटल होती है। किसानों को बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। 👉🏻 खेती तथा खेती सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए कृषि ज्ञान को फॉलो करें। फॉलो करने के लिए अभी ulink://android.agrostar.in/publicProfile?userId=558020 क्लिक करें। स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉🏻 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। यदि दी गई जानकारी आपको उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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