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सलाहकार लेखउद्दान विभाग उत्तर प्रदेश
आलू के भयंकर चेचक रोग से बचाव उपाय !
किसान भाइयों आलू  की फसल में चेचक रोग का प्रकोप होने पर आलू में छेद हो जाता है और उसकी आकृति भी ख़राब हो जाती है। खेत में अंकुरण कम होने के कारण पौधों की संख्या कम हो जाती है। रोग ग्रसित कंदो की सतह पर गहरे भूरे से काले रंग के आसमान जो सुई की नोक से लेकर मटर के दाने के बराबर चेपदार पिंड (धब्बे) होते हैं। ये अनियमित धब्बे रोगकारक के दृढ बीजाणु होते हैं। फफूंदी से जीवाणु आलू बीज की सतह पर  होने के कारण एक खेत से दूसरे खेत व साल दर साल फैलते रहते हैं।इसका नियंत्रण कंदो को भण्डारण से पूर्व ऑर्गेनोमर्करी योगिक जैसे एगलाल-03 (0.2 %) ऐराटन-06 (0.2 %) के घोल में लगभग 15 से 20 मिनट डुबोकर रखें अथवा बोरिक अम्ल के 03% घोल में 30 मिनट  डुबोकर उपचारित करें। इस ऑर्गेनोमर्करी योगिक के घोल में 20 बार आलुओं को डुबोने के काम में लाया जा सकता है। कृषक भाई साइकोडर्मा दवा से भी बीज का शोधन कर सकते है और इसके पाउडर को गाय के गोबर में मिलाकर खेत में डालें। इसके अतिरिक्त आलू के बाद मक्का या लैंचा का फसल चक अपनाने से काफी हद तक रोग को नियंत्रित किया जा सकता है एवं ग्रीष्मकाल समय में गहरी जुताई करें जिस खेत में चेचक का रोग लग गया है  उस खेत में 3-4 साल तक आलू की फसल न ली जाए।
स्रोत- उद्दान विभाग उत्तर प्रदेश, यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो इसे  लाइक करें तथा अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद।
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