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कृषि वार्ताTV 9 Hindi
अरे वाह! किसान क्रेडिट कार्ड पर मिलते हैं इतने फायदे, जानें विस्तार से!
👉🏻 किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से खेती-किसानी के लिए लोन लेने के फायदे के बारे में आप जानते होंगे। लेकिन इसके कई फायदे ऐसे हैं जिससे लोग अनजान हैं। केसीसी किसानों की हर प्रकार की मदद करती है जिससे उनकी खेती आगे बढ़े और खेती के बाद पैदा होने वाली उपज भी उन्हें अच्छी कमाई दे सके। 👉🏻 कृषि विशेषज्ञ डॉ. डीबी पाठक बताते हैं कि अधिकांश किसानों ने यह कार्ड बनवाया हुआ है जिससे फायदे काफी हैं। अब किसानों को समायदारों के पास नहीं जाना पड़ता। पहले आढ़ती किसानों की सारी पैदावार ले लेते थे। दो-तीन परसेंट ब्याज पर किसानों को आढ़ती पैसा देते थे। किसानों पर इतना ब्याज लद जाता था कि उनकी सारी फसल आढ़तियों के पास चली जाती थी। अब भारत सरकार ने केसीसी की जो योजना चलाई है उससे अधिकांश किसान फायदा उठा रहे हैं। खेती के लिए पैसे की कमी नहीं 👉🏻 किसानों का मानना है कि केसीसी के चलते उन्हें बैंक की तरफ से समय पर लोन मिल जाता है जिससे खेती-बाड़ी समय पर हो जाती है. पैसे की कमी से खेती नहीं रुकती। इसका फायदा होता है कि समय पर पैदावार घर पहुंच जाती है और अच्छी कीमत पर उसे बाजार में बेच दिया जाता है। किसानों को केसीसी देने के पीछे मकसद यही है कि उन्हें समय पर किफायदी ऋण मिल सके। भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड ने 1998 में केसीसी की अवधारणा विकसित की। इसके पीछे उद्देश्य यही था कि किसानों को सुलभ कैश क्रेडिड यानी कि ऋण मुहैया कराया जा सके। मौसमी मार से बचाने में मदद 👉🏻 केसीसी किसानों को किसी भी वक्त बिना किसी रुकावट खेती के लिए पर्याप्त ऋण मुहैया कराने में मदद करता है। यह कार्ड लोन पेमेंट के मामले में सुविधा देता है। समय पर लोन चुका दें तो ब्याज की दर कम लगती है। फसल अगर खराब हो जाए या फसलों पर मौसम की मार पड़ जाए तो केसीसी के ऋण को इसी हिसाब से निर्धारित किया जाता है। किसान क्रेडिट कार्ड 5 साल तक वैध है और इसका वार्षिक रिन्यूअल भी किया जाता है। किसान क्रेडिट कार्ड के जरिये बैंकों से लोन लिया जा सकता है जिसका ब्योरा रखने के लिए एक पासबुक जारी किया जाता है। कागजी झंझट नहीं 👉🏻 पहले किसानों को बैंक से लोन लेने में कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। जैसे कि बैंकों में लंबी लाइन और कागजी कार्यवाही की पेचीदगी। बैंकों की थकाऊ प्रक्रिया के चलते किसानों को गैर संस्थागत ऋण पर निर्भर रहना पड़ता था। इसमें साहूकारों के चंगुल में फंसने का खतरा ज्यादा था। किसानों की आत्महत्या के पीछे इसे भी एक बड़ा कारण बताया गया है। इन सभी बाधाओं और झंझटों से मुक्ति देते हुए किसान क्रेडिट कार्ड आज खेती-बाड़ी के लिए ऋण मुहैया कराने में मदद कर रहा है। आज किसान अपनी खेती की जरूरतों के लिए बैंकों से पैसा पा सकते है। आढ़तियों से मुक्ति 👉🏻 किसानों का कहना है कि केसीसी आने से पहले आढ़तियों से कर्ज लेना पड़ता था जिसका ब्याज भारी होता था। इसके एवज में आढ़तियों की कमाई अच्छी हो जाती थी जबकि किसान कर्ज से दबा रहता था। अब ऐसा नहीं है क्योंकि किसान आढ़तियों के पास न जाकर बैंक से खेती के लिए पैसा लेता है। उस पैसे से बीज और खाद आदि खरीदे जाते हैं और समय पर खेती हो जाती है। केसीसी ने किसानों को सूदखोरों के चंगुल से बचाया है। सरकार का प्रयास है कि केसीसी जैसी योजना से खेती की लागत कम की जाए। अगर ज्यादा ब्याज पर किसान ऋण लेगा तो लागत तेजी से बढ़ेगी। उस हिसाब से फसलों की पैदावार और बिक्री न हो तो किसान घाटे में चला जाएगा. केसीसी इससे पार पाने का एक सुलभ जरिया है। ऋण की लिमिट और बढ़ाने की मांग 👉🏻 केसीसी के उधारकर्ता को एटीएम सहित एक खाता जारी किया जाता है। एटीएम के जरिये किसान एटीएम और पीओएस मशीनों पर विड्रॉल कर सकते हैं। अगर केसीसी में पैसे जमा रहेंगे तो उस पर सेविंग खाते की तरह ब्याज मिलता है। केसीसी में 3 लाख रुपये तक की राशि पर कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं लगती। इस खाते को सालाना रिन्यूअल किया जाना जरूरी है। ताकि 5 साल तक इसकी ऋण सीमा को जारी रखा जा सके। किसानों की मांग है कि केसीसी में ऋण की लिमिट बढ़ा दी जाए ताकि ज्यादा पैसे से ज्यादा खेती की जा सके। 👉🏻 खेती तथा खेती सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए कृषि ज्ञान को फॉलो करें। फॉलो करने के लिए अभी ulink://android.agrostar.in/publicProfile?userId=558020 क्लिक करें। स्रोत:- TV 9 Hindi, 👉🏻 प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। यदि दी गई जानकारी आपको उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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