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सलाहकार लेखकिसान कल्याण एवं कृषि विभाग मध्यप्रदेश
अरहर की फसल में फली छेदक इल्ली का प्रबंधन!
फली छेदक इल्ली:- छोटी इल्लियाँ फलियों के हरे ऊत्तकों को खाती हैं व बडे होने पर कलियों, फूलों, फलियों व बीजों को नुकसान करती है। इल्लियाँ फलियों पर टेढे-मेढे छेद बनाती है। इस कीट की मादा छोटे सफेद रंग के अंडे देती है। इल्लियाँ पीली हरी काली रंग की होती हैं तथा इनके शरीर पर हल्की गहरी पट्टियाँ होती हैं। शंखी जमीन में बनाती है प्रौढ़ रात्रिचर होते है जो प्रकाष प्रपंच पर आकर्षित होते है। अनुकूल परिस्थितियों में चार सप्ताह में एक जीवन चक्र पूर्ण करती हैं। कीट नियंत्रणः- 👉🏻कीटों के प्रभावी नियंत्रण हेतु समन्वित संरक्षण प्रणाली अपनाना आवश्यक है। कृषि कार्य द्वारा: 👉🏻गर्मी में गहरी जुताई करें। 👉🏻शुद्ध/सतत अरहर न बोयें। 👉🏻फसल चक्र अपनाएं। 👉🏻क्षेत्र में एक समय पर बोनी करना चाहिए। 👉🏻रासायनिक खाद की अनुशंसित मात्रा ही डालें। 👉🏻अरहर में अन्तरवर्तीय फसले जैसे ज्वार , मक्का, सोयाबीन या मूंगफली को लेना चाहिए। यांत्रिकी विधि द्वारा:- 👉🏻प्रकाश प्रपंच लगाना चाहिए। 👉🏻फेरोमेन ट्रेप लगाये। 👉🏻पौधों को हिलाकर इल्लियों को गिरायें एवं उनकों इकटठा करके नष्ट करें। 👉🏻खेत में चिडियों के बैठने के लिए अंग्रेजी शब्द ’’टी’’ के आकार की खुटिया लगायें। जैविक नियंत्रण द्वारा:- 👉🏻एन.पी.वी. 500 एल.ई./हे. $ यू.वी. रिटारडेन्ट 0.1 प्रतिशत $ गुड 0.5 प्रतिशत मिश्रण का शाम के समय छिडकाव करें। 👉🏻बेसिलस थूरेंजियन्सीस 1 किलोग्राम प्रति हेक्टर $ टिनोपाल 0.1 प्रतिशत $ गुड 0.5 प्रतिशत का छिडकाव करें। 👉🏻इण्डोक्सीकार्ब 14.5 ई.सी. 500 एम.एल. या क्वीनालफास 25 ई.सी. 1000 एम.एल. या ऐसीफेट 75 डब्लू.पी. 500 ग्राम को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर छिडकाव करें। दोनों कीटों के नियंत्रण हेतू प्रथम छिडकाव सर्वांगीण कीटनाशक दवाई का करें तथा 10 दिन के अंतराल से स्पर्ष या सर्वांगीण कीटनाशक दवाई का छिडकाव करें। तीन छिडकाव में पहला फूल बनना प्रारंभ होने पर, दूसरा 50 प्रतिशत फूल बनने पर और तीसरा फली बनने की अवस्था पर करने से सफल कीट नियंत्रण होता है। स्रोत:- किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग मध्यप्रदेश, प्रिय किसान भाइयों अपनाएं एग्रोस्टार का बेहतर कृषि ज्ञान और बने एक सफल किसान। दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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