क्षमाा करें, यह लेख आपके द्वारा चुनी हुई भाषा में नहीं है।
Agri Shop will be soon available in your state.
जैविक खेतीएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
अनार में सूत्रकृमी (नेमाटोड) का जैविक नियंत्रण
वर्तमान, में नेमाटोड सभी फसलों में प्रमुख समस्या है। लगातार नमी वाले जगहों की फसलों की जड़ों पर सूत्रकृमी (नेमाटोड) का संक्रमण दिखाई देता है। सूत्रकृमी (नेमाटोड) सूक्ष्म आकार के होते हैं और यह फसल की छोटी जड़ के आंतरिक भागों में रहकर जड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इससे जड़ें प्रभावित होती हैं और पौधों का पोषण प्रभावित होने के साथ-साथ जड़ों पर गांठें बन जाती हैं। इस नुकसान के कारण पौधों की पत्तियां पीली हो जाती हैं। इसके अलावा, अन्य कवक जीवों को नेमाटोड के कारण होने वाले चोट से संक्रमित होने की अधिक संभावना रहती है। इससे पौधे सूख जाते हैं और उकटा रोग के लक्षण दिखाई देते हैं। सूत्रकृमी (नेमाटोड) के नियंत्रण के लिए जैविक प्रबंधन • अनार के नए बाग लगाने से पहले, खेत की मिट्टी में अच्छी तरह से धूप लगने दें, जिससे मिट्टी में होने वाले नेमाटोड को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। • अनार में टमाटर, सब्जी, मिर्च, भिंडी, खीरा आदि फसल अंतर-फसल के रूप में ना लें। • पौध रोपण के बाद, फसल के चारों ओर गेंदा लगाया जाना चाहिए। • नीम की खल को प्रति पेड़ 2-3 किलो गड्ढे के चारों ओर गहराई से मिश्रित किया जाना चाहिए। • गोबर खाद के साथ ट्रायकोडर्माप्लस जमीन में देना जाना चाहिए। इसका लगातार उपयोग करने की जरूरत है। • पैसिलोमाइकोसिस लिलॅसिनस @2-4 किलो प्रति एकड़ ड्रिप द्वारा (बूंद-बूंद सिंचाई) देना चाहिए। संदर्भ - एगोस्टार एग्रोनॉमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
348
3
संबंधित लेख