पशुपालनपशु विज्ञान केंद्र, आनंद कृषि विश्वविद्यालय
बाढ़ की स्थिति में पशुओं की देखभाल
बाढ़ से मनुष्यों और पशुओं के बीच स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएँ पैदा होती हैं। पशुओं पर खतरनाक कीड़े, सांप आदि द्वारा हमला किया जा सकता है। जब बाढ़ की दर बढ़ जाती है तो । यदि लंबे समय तक पर्याप्त पानी और चारे के उपलब्धता ना हो तो पशुधन भुखमरी से मरते है । पशुओं की देखभाल के लिए महत्वपूर्ण निर्देश नीचे दिए गए हैं।_x000D_ _x000D_ बाढ़ आने की संभावना होने पर पशुओं की सुरक्षा के उपाय_x000D_ • पशुओं को बांध कर न रखें, उन्हें खुले में रहने दें।_x000D_ • इलाके में बाढ़ की संभावना होने पर पशुओं को तुरंत ऊंची और सुरक्षित जगह पर ले जाएं।_x000D_ • पशुओं को स्थानांनतरित करते समय उस जगह पर सूखा चारा और पानी का पूरा प्रबंधन करें। _x000D_ _x000D_ बाढ़ खत्म होने के बाद रखें इन बातों का ध्यान_x000D_ • इस बात का ध्यान रखें कि पशु गंदा पानी न पिएं।_x000D_ • बाढ़ से पशु को निमोनिया, डायरिया, और त्वचा रोग के लक्षण दिखें तो नजदीकी पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें।_x000D_ • मृतक जानवरों को तुरंत पंजीकृत करने के लिए ग्राम पंचायत से संपर्क करें। स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी से पशुओं के शव का पोस्टमार्टम भी जरूर कराएं ताकि सरकारी मदद मिलने में कोई परेशानी खड़ी न हो।_x000D_ • स्थानीय प्राधिकारी से बाढ़ खत्म होने का निर्देश मिलने के बाद ही मवेशियों को अपनी पुरानी जगह लेकर जाएं।_x000D_ • यदि बारिश के कारण हरा सूखा चारा ज्यादा भीग न गया हो तो उन्हें थोड़ा सा सूखाकर जानवर को दें। यदि ज्यादा गीला हुआ हो तो उसे निकाल दें। _x000D_ _x000D_ स्रोत : पशु विज्ञान केंद्र, आनंद कृषि विश्वविद्यालय _x000D_
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