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सरसों में आरा मक्खी का नियंत्रण!
इस कीट की सुंडी ही फसल को नुकसान पहुँचाती है। मादा पत्तियों के किनारे की कोषिकाओं में एक-एक करके अण्डे देती है। अण्डो से 5-7 दिन में मटमैली लटें निकलती है। लटें पत्तियों को तेजी से खाती है जिससे पत्तियों में अनेक छेद हो जाते है। तीव्र प्रकोप में पत्तियों के स्थान पर शिराओं का जाल ही बनाते है। यह कीट अक्टूबर में दिखाई देता है व नवम्बर से दिसम्बर तक काफी नुकसान करता है। सरसों की फसल उगते ही इनका प्रकोप शुरू हो जाता है। अतः फसल की छोटी अवस्था में इससे भारी क्षति होती है। इस कीट के नियंत्रण के लिए कटाई के बाद गहरी जुताई करें। जिससे प्यूपा जमीन की सतह पर आ जाते हैं जो धूप व चिड़ियों द्वारा नष्ट कर दिये जाते है। मूली, शलजम, तोरिया की अगेती फसलों पर कीट की रोकथाम करें इससे सरसों पर प्रकोप की सम्भावना कम होगी। 25 अक्टूबर से पूर्व बुवाई करें। खेत में पानी देने से सूंडिंयाँ पानी में डूब कर मर जाती है। अधिक प्रकोप की अवस्था में मैलाथियान 50 ई.सी.@ 500 मिली प्रति लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर छिडकाव करना चाहिए। आवश्यकता पडने पर दुबारा छिडकाव करना चाहिए।
स्रोत:- DRMR, प्रिय किसान भाइयों दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक👍करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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