कृषि वार्तान्यूज18
2.5 लाख राजस्थान किसानों को मिलेगा 750 करोड़ का बीमा का दावा
राजस्‍थान के करीब ढाई लाख किसानों को जल्द ही 750 करोड़ के फसल बीमा दावा (क्रॉप इन्श्योरेन्स क्लेम ) का भुगतान होगा। राज्य सरकार ने इसके लिए 250 करोड़ की प्रीमियम राशि कृषक कल्याण कोष से चुकाने की स्वीकृति दे दी है। फसल बीमा का लाभ लेने के लिए किसानों को योजना में अपना पंजीकरण करवाना होता है और प्रीमियम (Premium) भरना पड़ता है। कृषि विभाग की ओर से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना की अधिसूचना जारी की जाती है। उसके बाद कोई भी किसान इसमें अपना पंजीकरण करवा सकता है। फसल बीमा करवाने के लिए आधार कार्ड और बैंक पासबुक की फोटो कॉपी के साथ ही जमीन की नवीनतम जमाबंदी जरूरी होती है। जो किसान बैंक से फसली ऋण लेते हैं, उनका बैंक अपने स्तर पर बीमा प्रीमियम काटकर बीमा कर देते हैं। लेकिन, इस बार से फसली बीमा को स्वैच्छिक किया गया है। जो किसान बीमा नहीं करवाना चाहते हैं, उन्हें इसके लिए बैंक को लिखित में सूचना देनी होती है। *इन स्थितियों में मिलता है क्लेम* कृषि विभाग की ओर से अधिसूचित फसलें फसल बीमा के दायरे में शामिल होती हैं। बीमा करवाने पर कई तरह के जोखिम उसमें शामिल होते हैं जो विपरीत परिस्थितियों में किसानों के लिए सहारा साबित होते हैं। फसलों की बुवाई न कर पाने या असफल अंकुरण का जोखिम फसल बीमा में शामिल होता है। बीमित क्षेत्र में कम बारिश या प्रतिकूल मौसम से बुवाई और अंकुरण नहीं हो पाने पर किसानों को योजना के तहत सुरक्षा मिलती है। *ये सभी जोखिम होते हैं बीमा में कवर* खड़ी फसल की बुवाई से कटाई तक सूखा, बाढ़, जलप्लावन, कीटों या रोगों का प्रभाव, भूस्खलन, प्राकृतिक कारणों से आग, आकाशीय बिजली, तूफान, ओलावृष्टि और चक्रवात जैसे रोके ना जा सकने वाले जोखिम भी इस योजना में शामिल हैं। वहीं फसल की कटाई के बाद जब उसे सुखाने के लिए रखा जाता है और इस दौरान भी यदि 14 दिन के अन्दर प्राकृतिक कारणों से उसमें नुकसान होता है तो यह नुकसान बीमा योजना के दायरे में आता है। इसके साथ ही अन्य आपदाएं जैसे ओलावृष्टि, भूस्खलन, जल भराव, बादल फटने या बिजली गिरने के कारण आग लगने से फसल को होने वाले नुकसान को भी इसमें शामिल किया गया है। *किसान भरते हैं नाम मात्र का प्रीमियम* प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को नाम मात्र का प्रीमियम भरना पड़ता है। शेष राशि केंद्र और राज्य सरकार आधी-आधी वहन करती है। खरीफ फसल के लिए किसान को बीमित राशि का 2 प्रतिशत प्रीमियम भरना पड़ता है, जबकि रबी फसल के लिए उन्हें बीमित राशि का डेढ़ प्रतिशत प्रीमियम चुकाना पड़ता है। इसी तरह वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए किसान को बीमित राशि का 5 प्रतिशत प्रीमियम भरना पड़ता है। स्रोत- न्यूज़ 18, 19 अगस्त 2020, प्रिय किसान भाइयों यदि आपको दी गयी जानकारी उपयोगी लगी तो इसे लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद"
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