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अनार में बहार नियंत्रण!
अनार में वर्ष मे तीन बार जून-जुलाई (मृग बहार), सितम्बर-अक्टूबर (हस्त बहार) एवं जनवरी-फरवरी (अम्बे बहार) में फूल आते हैं। व्यवसायिक रूप से केवल एक बार की फसल ली जाती है। और इसका निर्धारण पानी की उपलब्धता एवं बाजार की माँग के अनुसार किया जाता है। जिन क्षेत्रों मे सिंचाई की सुविधा नही होती है, वहाँ मृग बहार से फल लिये जाते हैं। तथा जिन क्षेत्रो में सिचाई की सुविधा होती है वहाँ फल अम्बें बहार से लिए जाते हैं। बहार नियंत्रण के लिए जिस बहार से फल लेने हो उसके फूल आने से दो माह पूर्व सिचाई बन्द कर देनी चाहिये।
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