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थानों की सूजन के लिए
इस रोग के निदान के लिए रोग के चिन्ह, दूध की जाँच या थानों की जाँच से होता है। दूध की जाँच मैस्टाइटिस डिटेक्शन किट या क्लोराइट टेस्टल केटालेज टेस्ट द्वारा किया जा सकता है।
आज का सुझाव  |  पशु चिकित्सक
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भेड बकरी में रोग फैलने पर
भेड़ और बकरियाँ में भी गायों और भैंसों जैसी कई तरह की बीमारियों देखने को मिलती है, गाय और भैंसो की मात्रा में भेड़ और बकरियों में बीमारी का प्रसार बहुत तेजी से होता...
आज का सुझाव  |  पशु चिकित्सक
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भेड़ बाकिरियो में होने वाला enterotoxemia रोग
यह रोग क्लोस्ट्रियम नामक जीवाणु से होने वाला एक गंभीर रोग है, यह रोग में पशु दीवार के साथ शर टकराते है, चक्कर आना आदि चिन्ह होता है। इस रोग का उपचार तुरंत करना आवश्यकता...
आज का सुझाव  |  पशु चिकित्सक
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दूध दोहन के बीच की अवधि
दूध दोहन का बीच का अवधि बारह घंटे रखना आवश्यक है, अगर कोई पशु ज्यादा मात्रा में दूध देता हे तब उनको दिन में तीन बाद दोहन करना चाहिए।
आज का सुझाव  |  पशु चिकित्सक
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दूध उत्पादन हेतु अजोला चारा
इनका उपयोग पशु के दूध की मात्रा एवं वसा प्रतिशत बढ़ने के लिए किया जा रहा हे। इनके उत्पादन मे कम लागत आती है। अजोला के कारण पशु में 10 से 15 प्रतिशत दूध बढ़ता है।
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नफाकारी पशुपालन
• पशु को हररोज टुकड़े किये गए चारा ही खिलाये • ठंड, गर्मी और बारिश से बचाने के लिए एक अच्छा शेड बनाएं। • मौसम के अनुसार पर्याप्त, स्वच्छ पानी और पौष्टिक आहार दें।
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शुरुआती दूध का निकाल
दूध निकालना शुरू करते समय, पहले दूध के धार (फॉर मिल्क )को एक अलग बर्तन में निकालना चाहिए।
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