पशुपालनकृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार
पौष्टिकता बढ़ाने के लिए भूसा/पुआल का यूरिया उपचार
परिचय_x000D_ भूसे का यूरिया से उपचार करने से उसकी पौष्टिकता बढ़ती है और प्रोटीन की मात्रा भूसे में लगभग 9% हो जाती है। पशु को यूरिया उपचारित चारा खिलाने पर उसको नियमित दिए जाने वाले पशु आहार में 30% तक की कमी की जा सकती है।
उपचार_x000D_ उपचार के लिए चार किलो यूरिया को 40 लीटर पानी में घोलें। एक किवंटल भूसे को जमीन में इस तरह फैलाएं कि परत की मोटाई लगभग 3 से 4 इंच रहे। तैयार किये गये 40 लीटर घोल को फैलाए गये भूसे पर फवारे से छिड़काव करें। फिर भूसे को पैरों से अच्छी तरह दबाएं। इस दबाए गए भूसे के उपर पुनः एक क्विंटल भूसा फैलाएं पुनः चार किलो यूरिया को 40 लीटर पानी में घोलकर फवारे से भूसे के ऊपर छिड़काव करें और इस परत को भी दबाएं। इस तरह एक के एक ऊपर एक सौ-सौ किलो की 10 परतें डालते जाएं, घोल का छिड़काव करते जाएं और दबाते जाएं। उपचारित भूसे को प्लास्टिक की तिरपाल से ढक दें और उसमें जमीन में लगने वाले किनारों पर मिट्टी डाल दें। जिससे बाद में बनने वाली गैस बाहर न निकल सके। एक बार में कम से कम एक टन भूसे का उपचार करना चाहिए। उपचार करने के लिए पक्का फर्श अधिक उपयुक्त रहता है। यह उपचार किसी बंद कमरे में सुविधाजनक रहता है। उपचार किये गये भूसे के ढेर को गर्मी में 21 दिन व सर्दी/मानसून में 26 दिन बाद ही खोलें। खिलाने से पहले भूसे को लगभग 10 मिनट तक खुली हवा में फैला दें। जिससे उसकी गैस उड़ जाए। शुरुआत में पशु को उपचारित भूसा थोड़ा-थोड़ा दें। _x000D_ स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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