कृषि वार्ताद इकोनॉमिक टाइम्स
मानसूनी बारिश से कृषि में आई जान!
मानसून की बारिश में आई तेजी से खेती-बाड़ी के लिए अनुकूल स्थिति बन गई है। जलाशयों में काफी पानी भर चुका है, खरीफ फसलों की बुआई रफ्तार पकड़ चुकी है। जानकारों का कहना है कि इस साल अनाज का रिकॉर्ड उत्पादन हो सकता है। जलाशयों में पिछले 10 साल के औसत के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा पानी भर चुका है। पिछले 30 दिनों में बुआई में आई कमी की अब भरपाई हो रही है। धान की बुआई की कमी भी अगस्त के अंत तक दूर हो जाएगी। पश्चिम बंगाल और झारखंड में अगस्त तक धान की बुआई होती है। कृषि मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, तिलहन की बुआई करीब पिछले साल जितनी है, कॉटन की बुआई 5.6 फीसदी ज्यादा है, जबकि दलहन और मोटे अनाज की बुआई 3.5 फीसदी कम है। धान की बुआई 11 फीसदी कम है। यह बारिश न सिर्फ खरीफ फसलों के लिए फायदेमंद है बल्कि रबी फसलों को भी इससे लाभ मिलेगा। जलाशयों में पानी का स्तर बहुत अच्छा है। भूमिगत जल का स्तर भी बढ़ा है। मानसून की अच्छी बारिश खासकर सीजन के अंत में होने वाली बारिश रबी फसलों के लिए भी अच्छी मानी जाती है। इसके चलते मिट्टी में नमी का स्तर बढ़ जाता है। स्रोत – इकोनॉमिक टाइम्स, 17 अगस्त 2019
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