कृषि वार्ताआउटलुक एग्रीकल्चर
किसानों को पराली प्रबंधन के लिए 588 करोड़ रुपये की सब्सिडी
नई दिल्ली। पराली प्रबंधन की मशीन खरीदने के लिए केंद्र सरकार किसानों को 2019 में 588 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी कर चुकी है। पिछले साल यह रकम 565 करोड़ रुपये थी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने बताया कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। पराली को खेतों में न जलाकर उसे आमदनी का जरिया बनाएं। इससे वायु प्रदूषण में कमी आएगी और खेत में पानी की भी बचत होगी। अब लोग समझने लगे हैं कि पराली जलाने से उनकी जमीन की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। अवशेषों को खेत में ही मिलाएंगे तो वे खाद का काम करेंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में 4,500 गांव पूरी से तरह पराली का प्रबंधन करने लगे, जबकि इसके पिछले साल यह आंकड़ा केवल 100 था। पराली जलाने के मामलों में साल 2018 के दौरान हरियाणा में 40 से 45 फीसदी की कमी आई है। पंजाब में ऐसे मामले 14 से 15 फीसदी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 से 29 फीसदी कम हुए हैं। सहकारी संगठनों को 80 फीसदी तक और किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि पराली को खेत में मिलाने से कार्बन, फॉस्फोरस की मात्रा बढ़ती है। पराली प्रबंधन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। स्रोत – आउटलुक एग्रीकल्चर, 13 अगस्त 2019
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