कृषि वार्ताकृषि जागरण
फॉल आर्मीवार्म के खिलाफ लड़ेगा प्रोजेक्ट ‘सफल’
इस प्रोजेक्ट के माध्यम से तकनीकों, अच्छी कृषि पद्धतियों और नियंत्रण उपायों को विकसित कर फॉल आर्मीवार्म से होने वाले नुकसान को कम करना है।
देश में कृषि कीट फॉल आर्मीवार्म से खेती की रक्षा के लिए प्रोजेक्ट ‘सफल’ लांच किया गया है। एक गैर-लाभकारी कृषि वैज्ञानिक संगठन दक्षिण एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (एसएबीसी) ने खेती की रक्षा के लिए इस परियोजना की शुरूआत की है। ‘सफल’ का लक्ष्य तकनीकों, अच्छी कृषि पद्धतियों और नियंत्रण उपायों को विकसित करना है ताकि फॉल आर्मीवार्म के खिलाफ किसानों की मदद की जा सके। फॉल आर्मीवॉर्म की पहली उपस्थिति अगस्त 2018 में कर्नाटक में मक्का की फसल में देखी गई। इससे विशेष रूप से मक्का की फसल को भारी नुकसान होता है। यह फसल पर शुरूआती चरणों में ही हमला कर देता है। फॉल आर्मीवॉर्म स्वीट कॉर्न, बेबी कॉर्न, मक्का, गन्ना और ज्वार के साथ ही कई महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसलों को प्रभावित करता है। कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में इस कीट के मिलने की सूचना मिली है। एसएबीसी के अध्यक्ष डॉ. सीडी माई ने कहा कि छोटे किसानों की भागीदारी के माध्यम से कपास में पिंक बॉलवर्म से निपटने के व्यावहारिक अनुभवों का पता लगाया जाएगा और फॉल आर्मीवॉर्म के खतरे को दूर करने के लिए उपाए ढूंढे जाएगें। हाल के दिनों में एसएबीसी ने महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में पिंक बॉलवर्म पर अभियान को सफलतापूर्वक लागू किया। स्रोत – कृषि जागरण, 8 मार्च 2019 यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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