कृषि वार्ताकृषि जागरण
5 हजार रुपये आएंगे सीधे किसान के खाते में!
केंद्र सरकार ने कृषि मंत्रालय को 9 जनवरी तक किसानों को राहत पहुंचाने का फॉर्मूला पेश करने के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री बिचौलियों को रोकने के लिए किसानों के खाते में सीधा पैसे भेजने के पक्ष में हैं। सरकार एक फसली मौसम में औसतन चार से पांच हजार रुपये की राहत किसान को देने की तैयारी में है। इस पर लगभग एक लाख 22 हजार करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। केंद्र के इस फॉर्मूले में किसी तरह की कमी से बचने के लिए कैबिनेट सचिव ने मंत्रालय के अधिकारियों को विभिन्न राज्यों की कृषि राहत योजनाओं को भी परखने का आदेश दिया है। कैबिनेट सचिव ने देशभर से आंकड़े एकत्र करने के साथ ही राज्यों की किसान राहत योजनाओं में व्यय और राहत का आकलन करने को कहा है। फिलहाल तेलंगाना का मॉडल सबसे बढ़िया माना गया है, जिसमें किसानों को जमीन के हिसाब से एकमुश्त रकम दी जा रही है। ओडिशा, झारखंड में चल रही किसान कल्याण योजना के साथ यूनिवर्सल बेसिक स्कीम और मध्य प्रदेश की पिछली शिवराज सरकार की भावांतर योजना भी सूची में रखी गई हैं।
केंद्र सरकार किसानों के कर्ज माफी के पक्ष में नहीं है। उनका मानना है कि कर्ज माफी का लाभ महज उन किसानों को मिलता है, जिन्होंने बैंक से कर्ज लिया है। देश में किसानों की संख्या का करीब 50 से 55 फीसदी हिस्सा बटाई या ठेके पर जमीन लेकर खेती करता है, जिन्हें बैंक से कर्ज नहीं मिलता। ऐसे में सरकारी कर्ज माफ का लाभ इन तक नहीं पहुंचता। स्रोत- कृषि जागरण, 7 जनवरी 2019
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