कृषि वार्ताकृषि जागरण
मोदी सरकार ने फॉस्फोरस और पोटाशयुक्त उर्वरकों पर सब्सिडी दरें की तय, 22,186 करोड़ रुपए बढ़ी राशि
मोदी सरकार ने कोविड-19 महामारी संकट से जूझ रहे किसानों को एक बड़ी राहत दी है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल के आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) बैठक हुई जिसमें किसानों के हित में कई अहम फैसले लिए गए। इसी कड़ी में सरकार ने जारी वित्त वर्ष के लिए उर्वरक सब्सिडी को बढ़ा दिया है। _x000D_ मोदी सरकार की अध्यक्षता वाली बैठक में किसानों से जुड़े कई विषयों पर चर्चा की गई। इसमें उर्वरक सब्सिडी भी शामिल है। सरकार ने उर्वरक सब्सिडी को बढ़ाकर 22,186.55 करोड़ रुपए कर दिया है। माना जा रहा है कि इस तरह उर्वरकों पर कुल सब्सिडी व्यय वित्त वर्ष के दौरान 5 से 7 प्रतिशत बढ़ सकता है। इसमें फॉस्फोरस और पोटाशयुक्त उर्वरकों को भी शामिल किया गया है। उर्वरक सब्सिडी के लिए फॉस्फोरस और पोटाशयुक्त उर्वरकों को शामिल करने की मांग काफी समय से चल रही थी। फिलहाल, इस संबंध में (एनबीएस) दरों के निर्धारण को मंजूरी मिल गई है। इस फैसले के बाद उर्वरक कंपनियों को (सीसीईए) की अनुमोदित दरों पर फॉस्फोरस और पोटाशयुक्त उर्वरकों पर सब्सिडी मिलेगी।_x000D_ _x000D_ गैर-यूरिया की सब्सिडी दरें घटाईं_x000D_ इस बार सरकार ने गैर-यूरिया उर्वरकों की सब्सिडी दरों में कटौती की है। इस दौरान सरकारी खजाने पर उर्वरक सब्सिडी का बोझ कम होकर 22,186.55 करोड़ रुपए पड़ेगा। इन पर साल 2019-20 में कुल सब्सिडी खर्च 22,875 करोड़ रुपए था। _x000D_ _x000D_ साल 2020-21 के लिए नाइट्रोजन पर सब्सिडी को 90 से घटाकर 18.78 रुपए कर दी है। _x000D_ • फॉस्फोरस पर सब्सिडी 21 से घटाकर 14.88 रुपए तय की है। _x000D_ • पोटाश पर सब्सिडी 12 से घटाकर 10.11 रुपए हो गई है। _x000D_ • सल्फर पर दी जाने वाली सब्सिडी 56 से घटाकर 2.37 रुपए प्रति किलो कर दी गई है। _x000D_ डीएपी-एनपीके के दाम हुए नियंत्रण मुक्त_x000D_ आपको बता दें कि सरकार की तरफ से किसानों को सस्ते दाम पर उर्वरकों, यूरिया और 21 ग्रेड के फॉस्फोरस और पोटाशयुक्त उर्वरकों को उपलब्ध कराने के लिए विनिर्माताओं या आयातकों को सब्सिडी दी जाती है। फिलहाल, सरकार ने डीएपी, एमओपी और एनपीक जैसे गैर-यूरिया उर्वरकों की कीमतों को नियंत्रण मुक्त कर दिया है। इनका निर्धारण इनके विनिर्माताओं पर ही छोड़ दिया गया है। बता दें कि हर साल सरकार की तरफ से उन्हें एक निर्धारित सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा यूरिया के लिए खुदरा मूल्य तय कर देती है। इसके बाद उत्पादन लागत और तय एमआरपी के बीच के मूल्य का अंतर ही विनिर्माताओं को उपलब्ध करा दिया जाता है। _x000D_ स्रोत:- कृषि जागरण, 23 अप्रैल 2020 _x000D_ कृषि वार्ता में दी गई जानकारी उपयोगी लगे तो लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों को शेयर करें। _x000D_
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