AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
09 Jan 20, 10:00 AM
गुरु ज्ञानएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
चने में फली छेदक इल्ली का प्रबंधन (आईपीएम)
सर्दियों के मौसम में चने की खेती पूरे भारत में सिंचित एवं असिंचित दोनों ही प्रकार से की जाती है। बुवाई से लेकर कटाई तक "फली छेदक" इस फसल को हानि पहुँचाता है। इल्ली पहले नई पत्तियों या फली की ऊपरी परत को खरोंच कर नुकसान करती है। फली निर्माण के समय, इल्ली फली में छेद बनाती है और विकासशील बीज को खाती हैं। कभी-कभी, इल्ली पूरी तरह फली में प्रवेश कर पूरी तरह से विकसित बीज खाते हैं। प्रबंधन: 1. फेरोमोन जाल @ 40 प्रति हेक्टेयर स्थापित करें। 2. बिजली पास होने पर एक प्रकाश जाल भी स्थापित करें। 3. शिकारी पक्षियों को आकर्षित करने के लिए टी-आकर के जाल स्थापित करें। 4. प्रकोप होने पर, ब्युवेरिया बेसियाना, एक फफूंद आधार कीटनाशक @ 40 ग्राम या बैसिलस थुरिंजिनिसिस, एक जीवाणु आधार पाउडर @ 15 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी का छिड़काव करें। 5. यदि हरी फली के लिए फसल उगाई जाए तो किसी भी रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव न करें। इसके बजाय, नीम आधारित यौगिकों को 20 मिली (1% ईसी) से 40 मिलीलीटर (0.15% ईसी) प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। 6. अधिक प्रकोप होने पर, फेनवलरेट 20 ईसी @ 10 मिली या लेम्बडा साइहेलोथ्रिन 5 ईसी @ 5 मिली या थायोडिकार्ब 75 डब्ल्यूपी @ 20 ग्राम या क्लोरेंट्रानिलिप्रोएल 18.5 एस.सी.@ 3 मिली प्रति 10 लीटर पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करें। स्रोत : एग्रोस्टार एग्रोनॉमी सेंटर एक्सीलेंस यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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