कीट जीवन चक्रएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
चने में फली छेदक कीट का जीवन चक्र
चना भारत की सबसे महत्वपूर्ण दलहन फसल है। आमतौर पर चना या बंगाल चना के नाम से जाना जाता है। इसका उपयोग मानव उपभोग के साथ-साथ पशुओं के भोजन के लिए भी किया जाता है, अनाज, ताजी हरी पत्तियों का उपयोग सब्जी के रूप में किया जाता है, जबकि काबुली चना मवेशियों के लिए एक उत्कृष्ट चारा है। चना फली छेदक एक पॉलीफैगस कीट है, जो चना, सेम, कुसुम, मिर्च, मूंगफली, तंबाकू, कपास को संक्रमित करता है। क्षति के लक्षण:- इस कीट की केवल सूंडी ही नवंबर माह से मार्च तक चने की फसल को नुकसान पहुंचाती है। शुरुआत में यह कोमल पत्तियों एवं टहनीयों को खाती है बाद में फल आने पर छेद करके आधी अंदर एवं आधी बहार होती है। जो फसल को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचाती है। फली छेदक के कारण पैदावार में लगभग 50 से 60% नुकसान होता है। चने के अलावा अरहर, मटर, अन्य कृषि और बाग़बानी फसलों को भी नुकसान पहुँचती है। अंडा:- फली छेदक कीट की मादा पंतगा मैथुन के 2 से 4 दिन के बाद पौधे के कोमल हिस्सों टहनियों, पत्तियों और फूल पर एक-एक करके चमकीले, क्रीमी रंग के 500 से 1000 तक अण्डे देती हैं। यह अण्डे 2 से 3 दिन में फूटते हैं। सूंडी:- यह शुरुआत में कोमल पतियों पर जीवन निर्वाह करती है तथा फली लगने पर उसके अंदर प्रवेश करके बीजों को खाती है। इसको पूर्ण विकसित होने में 20 से 25 दिन लगते है। इसका रंग हल्का हरा चमकदार एवं पीले रंग की धारियां होती हैं। कृमिकोष:- सूंडी कृमिकोष में बदलने से पहले फलियों से निकल कर जमीन के अंदर 8 से 12 सेंटीमीटर जाकर खोल बनाकर कोषावस्था में बदलती है। यह 16 मिमी का होता है, इसका रंग लाल भूरा एवं पीछे की और नुकीला होता है। प्रौढ़:- प्रौढ़ कीट का रंग हल्का भूरा स्लेटीपन लिए रहता है शरीर पर बादामी भूरे रंग के बाल होते है।
नियंत्रण:- • फली छेदक को मारने वाले विभिन्न प्रकार के मित्र कीट अण्ड परजीवी-,ब्लैकवर्नी आदि, टेट्रास्टिकस का उपयोग करें। • प्रोफेनोफॉस 50 ईसी @2 मिली प्रतिलीटर, इंडोक्साकार्ब 14.5% एससी @ 0.5 मिली या स्पिनोसैड 45% एससी @0.1 मिली या 2.5 मिली क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी @ प्रति लीटर पानी के साथ छिड़काव करें। स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनॉमी सेंटर एक्सीलेंस यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
122
0
संबंधित लेख