सलाहकार लेखएग्रो संदेश
स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए रोपाई, उर्वरक और सिंचाई की जानकारी
स्ट्राबेरी की खेती शीतोष्ण क्षेत्रों (न ज्यादा ठंडे न ज्यादा गर्म तापमान वाले क्षेत्र) में सफलतापूर्वक की जा सकती है। लेकिन, मैदानी क्षेत्रों में सिर्फ सर्दियों में ही इसकी एक फसल ली जा सकती है। पौधे अक्टूबर-नवम्बर में लगाए जाते हैं। फल फरवरी-मार्च में तैयार हो जाते हैं। दिसम्बर से फरवरी माह तक स्ट्राबेरी की क्यारियां प्लास्टिक शीट से ढंक देने से फल एक माह पहले तैयार हो जाते हैं और उपज भी 20 प्रतिशत अधिक हो जाती है। एक बार रोपण के बाद लगातार तीन वर्षों तक स्ट्रॉबेरी की कटाई की जा सकती है। रोपण: - बीज और पौधे से निकलने वाले धावक द्वारा स्ट्रॉबेरी बोई जा सकती है। (पौधों पर नए पौधे उग आते हैं, उन्हें धावक कहा जाता है।) शुरुआती उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता का फल प्राप्त करने के लिए धावक को रोपण करना आवश्यक है। टिशू कल्चर से तैयार पौधों को भी प्रत्यारोपित किया जा सकता है। स्ट्रॉबेरी की रोपाई सितंबर के दूसरे पखवाड़े से अक्टूबर के पहले पखवाड़े तक की जानी चाहिए। रोपण 30/30 सेमी। या 60/60 सेमी की दूरी पर करें। रोपण से पहले पौधे के नीचे से सूखी पत्ती निकालें। रोपण के तुरंत बाद, मिट्टी में नमी बनाए रखें। उर्वरक और सिंचित: - फलन में सिंचाई की आवश्यकता भूमि की किस्म एवं मौसम की दशा पर अधिक निर्भर है। सामान्यत: अक्टूबर-नवम्बर में ड्रिप सिस्टम को प्रतिदिन 40 मिनट (20 मिनट सुबह एवं 20 मिनट शाम) तक अवश्य चलाएं। यह समय फसल की आवश्यकता के अनुसार घटाया-बढ़ाया भी जा सकता है। शीघ्र फल देने के प्रकृति के कारण स्ट्राबेरी को अधिक खाद एवं उर्वरक की आवश्यकता होती है। तैयार क्यारी में 2 किलो गोबर की खाद और 20 ग्राम डी.ए.पी. प्रतिवर्ग मीटर की दर से रोपाई के पूर्व ही मिला देते हैं। इसके बाद ड्रिप सिस्टम के द्वारा सिंचाई के पानी के साथ ही कोई ऐसा घुलनशील उर्वरक, जो नाइट्रोजन फास्फोरस, पोटाश एवं सूक्ष्म तत्व प्रदान कर सके, प्रति सप्ताह देते है। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश 50:25:35 किलो के हिसाब से प्रति एकड़ ड्रिप सिंचाई द्वारा देते हैं। संदर्भ: एग्रो संदेश
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