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सोयाबीन की फसल में एकीकृत कीट प्रबंधन
सोयाबीन की फसल पर विभिन्न प्रकार के कीड़ों का संक्रमण होता है। ये मुख्य रूप से सोयाबीन की फसल में ही पाए जाते हैं, जैसे कि पत्ती लपेटक, पत्ता खानेवाली इल्ली, तंबाकू इल्ली, स्पोडोप्टेरा लिटुरा, आदि। एकीकृत कीट प्रबंधन प्रणाली का उपयोग करने से कम लागत में इनका नियंत्रण किया जा सकता है। गर्मियों के दिनों में खेतों की गहरी जुताई करने से जमीन में रहने वाले पतंगों और कोकुन नष्ट हो जाते है। जुताई करने से फफूंद और बिषाणु भी नष्ट हो जाते हैं। सोयाबीन की बुवाई करते समय मुख्य फसल के साथ लगभग 100-200 ग्राम ज्वार की बिजाई भी करें ज्वार फसल पक्षियों को आकर्षित करती है और इस प्रकार मुख्य फसल को पक्षियों से होने वाले नुकसान से बचाती है। अरंडी की फसल को खेत के चारों ओर जाल फसल के रूप में लगाना चाहिए। यह सोयाबीन की फसल में होने वाली स्पोडोप्टेरा के सुंडी (इल्ली) को नियंत्रित करने में मदद करेगा। सोयाबीन की फसल उगने के बाद, फेरोमन ट्रैप को 10 से 20 दिन बाद @ 4 ट्रैप प्रति एकड़ लगाना चाहिए। जैसे ही वयस्क पतंगा जाल में फंस जाता है, तब सोयाबीन की फसल में 5% नीम के अर्क का छिड़काव करें। यदि आवश्यकता हो, तो 3 दिनों के अंतराल पर फिर से छिड़काव करें। सोयाबीन बुवाई के 20-25 दिनों के भीतर, 25-30 मीटर की ऊंचाई पर खेत में "टी'' आकार की लकड़ी स्थापित करना चाहिए। यह पक्षियों को प्राकृतिक तरीके से पक्षी इस पर बैठ कर कीटों को खा कर खत्म करते है। संदर्भ - श्री तुषार उगले, कीटविशेषज्ञ
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