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कपास की फसल में मिलीबग कीट का एकीकृत प्रबंधन
मिलीबग भारतीय मूल का कीट नहीं है और यह किसी और देश से आया हुआ है। इसका प्रकोप पहली बार 2006 में गुजरात में देखा गया था, जिसके बाद में अन्य राज्यों में भी देखा गया। मिलीबग संक्रमण हर साल कपास में और कुछ अन्य फसलों में भी देखा जाता है। इन दिनों, भारत में कपास की फसल में कई जगह पर देखा जा सकता है। मिलीबग कपास के पौधे के हर हिस्से से रस चूसते हैं। संक्रमित फसलें विकृत, झुर्रीदार या मुडे, गुच्छेदार पत्तियों, और पौधों के रूप में लक्षण प्रदर्शित करती हैं। संक्रमित पौधे पीले और पूरी तरह से सूख जाते हैं। यह पौधे की प्रकाश संश्लेषक गतिविधि में भी बाधा डालता है। मानसून में अंतराल होने पर इस किट की शुरुआत होती है या मानसून समाप्त होने के बाद,आबादी ज्यादा बढ़ती है।
एकीकृत प्रबंधन:_x000D_ • सभी वैकल्पिक-अवांछित पौधों को निकालें और नष्ट करें। _x000D_ • मिली बग से प्रभाबित खरपतवार को निकल कर पानी के स्रोत में न फेंके। _x000D_ • इसकी रोकथाम के लिए जुलाई से सितंबर के मध्य पौधों के आस पास गुड़ाई करना चाहिए। _x000D_ • प्रारंभिक अवस्था में कपास के पौधों को गंभीर रूप से प्रभावित किये हुए पौधों को खेत से दूर ले जाकर नष्ट कर देना चहिये। _x000D_ • फसल लगाते समय स्वस्थ बीजों का चयन करना चाहिए। _x000D_ • चीटियों की कालोनियों को समय समय पर नष्ट करते रहना चाहिए। _x000D_ • फसल कटाई के बाद गहरी जुताई करना चाहिए। _x000D_ • अंडों को नष्ट करने के लिए खेतों में सिचाई करना चाहिए। _x000D_ • जैविक कीट नियंत्रण के लिए परजीवी, परभक्षियों एवं प्राकृतिक शत्रुओं का उपयोग किया जाता है। _x000D_ • कीट प्रकोप के समय, नीम तेल @ 40 मिली या नीम आधारित सूत्रीकरण @ 40 मिली (0.15% ईसी) प्रति 10 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।_x000D_ • वर्टिसिलियम लेकेनी, फफूंद रोगजन @ 40 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी के साथ शाम के समय में छिड़काव करें_x000D_ • यदि कीट की संख्या अधिक हो तो प्रोफेनोफॉस 50% ईसी @ 10 मिली या थायोडीकार्ब 50% डब्ल्यूपी 10 ग्राम या बुप्रोफेजिन 25% एससी @ 20 मिली या क्लोरपायरीफॉस 20% ईसी @ 20 मिली प्रति 10 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें। इसके अलावा 10 लीटर घोल में दो चम्मच डिटर्जेंट पाउडर मिलाएं।_x000D_ • प्रत्येक छिड़काव पर कीटनाशक बदलें; सुनिश्चित करें कि पौधों को कीटनाशक का छिड़काव ठीक से कवर किया जाना चाहिए। _x000D_ • आगे फैलने से बचने के लिए खेत में चरने के लिए भेड़/बकरी/अन्य मवेशी को नहीं जाने देना चाहिए।_x000D_ डॉ. टी.एम. भरपोडा, एंटोमोलॉजी के पूर्व प्रोफेसर, बी ए कालेज ऑफ एग्रीकल्चर, आनंद कृषि विश्वविद्यालय, आनंद- 388 110 (गुजरात भारत) यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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