पशुपालनपशु संदेश
पशुओं में टीकाकरण का महत्त्व (भाग-1)
पशुओं के लिए टीकाकरण महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रतिवर्ष हजारों दुधारू पशु खतरनाक बीमारियों जैसे गलघोंटू, लंगडिया, खुरपका, मुंहपका के संक्रमण के कारण मारे जाते हैं जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। टीकाकरण का महत्व: पशुओं का उचित टीकाकरण पशु चिकित्सक की सलाह पर शुरुआत में ही कराएं साथ ही प्रति वर्ष पुन: टीकाकरण कराएं। यह एन्टीबाडी शरीर तथा वातावरण में उपस्थित सूक्ष्म जीवों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। टीके शरीर में एक जटिल तरीके से काम करते हैं अत: यह सलाह दी जाती है कि केवल स्वस्थ पशुओं को ही टीके लगाये जाएं। अस्वस्थ या बीमार पशुओं को टीके नहीं लगाना चाहिए। साथ ही पशु पालकों को टीके के बनने और उसके नष्ट होने (एक्सपायरी डेट) की तारीख पर अवश्य ध्यान देना चाहिए। बता दें कि वर्तमान समय में हम जैनोटिक रोगों (वह रोग जो पशुओं से मनुष्यों में फैलते हैं) की गंभीरता की अनदेखी नहीं कर सकते जैसे - रैबीज, एन्थ्रेक्स, ब्रसेलोसिस, क्षय रोग आदि। इसलिए पशुओं का टीकाकरण आवश्यक है। टीककरण और रोग से बचाव की शर्तें: टीकाकरण पशुओं में विभिन्न रोगों से बचाव को सुनिश्चित करता है। टीकाकरण करवाने से पूर्व पशुओं को अन्त: परजीवी नाशक दवा पशु चिकित्सक की सलाह पर देनी चाहिए। चारे में खनिज मिश्रण का प्रयोग कम से कम 45 दिन तक करें। टीकाकरण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए यह आवश्यक है कि टीकों का संरक्षण उचित तापमान पर होना चाहिए। भाग -2 में हम देखेंगे की कोनसे रोग के लिए पशु को कब टिका लगवाना चाहिए। स्रोत : पशु संदेश
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