कृषि वार्ताकृषि जागरण
हैदराबाद के इंजीनियरों ने बिजली पर चलने वाला ट्रैक्टर का किया निर्माण!
आम तौर पर फिलाल अधिकांश कृषि कार्य ट्रैक्टरों द्वारा किया जा रहा है। खेत से लेकर कटाई तक सब कुछ ट्रैक्टर की मदद से किया जाता है। लेकिन ट्रैक्टर को अधिक डीजल की लागत होती हैं, इसलिए किसानों को ईंधन के लिए अधिक भुगतान करना पड़ता है। इससे आम किसानों को ट्रैक्टर द्वारा कृषि कार्य करना महंगा पड़ता है। लेकिन जल्द ही किसानों की यह अतिरिक्त लागत बच जाएगी। ऐसा इसलिए हैदराबाद के एक इंजीनियर ने एक ऐसे ट्रैक्टर का निर्माण किया है जिसे किसी ईंधन की जरूरत नहीं है। कृषि के लिए अत्याधुनिक और सस्ती मशीनरी का निर्माण करनेवाले हैदराबाद में इंजीनियरों ने ईंधन की बढ़ती कीमतों और प्रदूषण को कम करने के लिए बिजली से चलने वाले इलेक्ट्रॉनिक ट्रैक्टर विकसित किए हैं। एक पारंपरिक डीजलपर चलनेवाले ट्रैक्टर को 100 रुपये से 150 रुपये प्रति घंटे खर्चा आता है। मुबाशिर और सिद्धार्थ दुराईराजन ने दावा किया है कि एक इलेक्ट्रॉनिक पर चलनेवाले ट्रैक्टर पर प्रति घंटा केवल 20 से 25 रुपये खर्चा आता है। दोनों इंजीनियरों के अनुसार, पारंपरिक खेती मशीनरी का उपयोग अधिक महंगा है। इससे किसान का लाभ कम होता है। इसके अलावा एक पारंपरिक ट्रैक्टर का रखरखाव अपेक्षाकृत उच्च लागत पर आता है। इसलिए, यदि इस ट्रैक्टर का उपयोग किया जाता है, तो यह किसान की लागत को बचा सकता है और उसका लाभ बढ़ा सकता है। यह प्रदूषण को कम करने में भी मदद कर सकता है। इस ट्रैक्टर की विशेषताएं क्या हैं 1) इस ट्रैक्टर का वजन 600 से 800 किलोग्राम के बीच है। 2) यह 1.2 टन तक माल ले जा सकता है। 3) रिचार्ज करने के लिए 6 से 8 घंटे लगते हैं। 4) इसे घर पर रिचार्ज किया जा सकता है। 5) यदि बैटरी पूरी तरह से चार्ज हो जाती है, तो यह 75 किमी की दूरी को 2 किमी प्रति घंटे पर कवर कर सकती है। स्रोत - कृषि जागरण 25 जुलाई 2020,
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