कृषि वार्ताद इंडियन एक्सप्रेस
कपास में पहली बार सैनिक कीट का संक्रमण
इस साल, महाराष्ट्र में 8.60 लाख हेक्टेयर की मक्का फसल के 2.63 लाख हेक्टेयर से अधिक भाग में सैनिक कीट का संक्रमण पाया गया। अब कॉटन इंप्रूवमेंट सेंटर (CIC) के सहायक कीटविशेषज्ञ डॉ. एन.के.भूट ने कपास की फसल पर भी सैनिक कीट (FAW) के संक्रमण का पहला मामला देखा है। उन्होंने बताया कि यह कीट राज्य के अहमदनगर जिले के पथारडी तालुका के सुसेरे गांव में देखा गया।
डॉ. भूटे ने बताया कि कपास की यह 1.5 एकड़ की फसल 3 एकड़ के मक्का फसल के खेत से सटी हुई थी। मक्का की फसल कम से कम 50 प्रतिशत तक गंभीर रुप से संक्रमित थी। उन्होंने कहा कि शायद यह कीट मक्के से कपास की फसल में स्थानांतरित हुआ है। कपास की फसल बॉल गठन की अवस्था में थी। यह पहली बार है जब कपास में इस कीट की सूचना मिली है। फसल की कटाई के बाद ही इसके नुकसान की मात्रा का पता लगेगा। 2018 में पहली बार देखा गया सैनिक कीट (एफएडब्ल्यू) (स्पोडोप्टेरा फ्रुगिपरेडा), मक्का, सोयाबीन और ज्वार सहित 80 विभिन्न फसलों को खाता है। इस कीट को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मक्का की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने के लिए जाना जाता है। पिछले साल इसके संक्रमण से भारत में मक्का उत्पादन में गिरावट आई थी। ज्वार में भी सैनिक कीट के संक्रमण की सूचना मिली है। महाराष्ट्र में कृषि विभाग ने सैनिक कीट को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है, लेकिन राज्य के विभिन्न हिस्सों से इससे नुकसान की खबरें हैं। चूंकि, कपास और मक्का ज्यादातर एक ही क्षेत्र में उगाए जाते हैं, इसलिए मक्का से कपास में इसके फैलने की संभावना है। भूट ने बताया कि मक्का (90 दिन), कपास (180 दिन) की तुलना में कम अवधि की फसल है, इसलिए मक्का की फसल के कटने के बाद सैनिक कीट आसानी से कपास में जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ‘एकीकृत कीट प्रबंधन समय की आवश्यकता है जो कीट के नियंत्रण में मदद करेगा।‘ नागपुर स्थित केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (सीसीआरआई) की एक टीम ने भी खेतों का दौरा किया है। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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