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गन्ने की फसल में पायरिल्ला कीट का नियंत्रण
यह कीट बहुत फुर्तीले होते हैं, एक पत्ते से दूसरे पत्ते पर कूदते हैं। जिस क्षेत्र में इनका संक्रमण अधिक होता है वहां जोर से शोर होता है। निम्फ और वयस्क दोनों ही पत्तियों से रस चूसते हैं और एक पदार्थ छोड़ते है पदार्थ उनके शरीर से स्रावित होता है और पत्तियों पर गिरता है। नतीजतन, गन्ने के पत्तों पर काले रंग का कालिखदार सांचा बनता है, जो गन्ने की प्रकाश संश्लेषक गतिविधि को प्रभावित करता है, और इनके प्रभाव से उपज में काफी हानि होती है। निम्नलिखित तरीकों से गन्ना पायरिल्ला को नियंत्रित किया जा सकता है : प्रबंधन: 1. वयस्कों द्वारा रखे गए अंडों के समूह को इकट्ठा करें और नष्ट करें। 2. मेथेरिज़ियम एनिसोप्लाय, फफूंद आधारित पाउडर @40 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। 3. एपिरिकेनिया मेलानोलुका परजीवी को छोड़े @1 लाख परजीवी (250 अंडे द्रव्यमान) या 2000 प्यूपा प्रति हेक्टेयर दें। 4. परजीवी छोड़े गए खेतों में किसी भी प्रकार का रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव न करें। 5. यदि खेत में परजीवी गतिविधि नहीं देखी जाती है और पायरिल्ला संक्रमण अधिक होता है, तो क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी @20 मिली या मोनोक्रोटोफॉस 36 ईसी @10 मिली प्रति 10 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
डॉ. टी.एम. भरपोडा, एंटोमोलॉजी के पूर्व प्रोफेसर, बी ए कालेज ऑफ एग्रीकल्चर, आनंद कृषि विश्वविद्यालय, आनंद- 388 110 (गुजरात भारत) यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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