पशुपालनपशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग: जूनागढ़
पशुओं में पाए जाने वाले सामान्य रोग और उनके प्राथमिक घरेलू उपचार
पशु संवर्धन और आहार के साथ पशुओं का स्वास्थ भी महत्वपूर्ण है। यदि पशुपालक को रोगों के निदान के बारे में थोड़ी जानकारी हो तो वह प्राथमिक उपचार करके रोग को आगे बढ़ने से बचा सकते हैं। यहां पशुओं के घरेलू उपचार के बारे में कुछ बुनियादी जानकारी दी गई हैं। अफरा इस प्रकार की बीमारी आमतौर पर तब होती है जब पशु हरा चारा अधिक खाते हैं। मानसून और सर्दियों में यह बीमारी अधिक होती है। इस बीमारी में पशु के पेट में गैस भर जाती है और पशु बेचैन हो जाता है। उपाय • 500 मिली खाद्य तेल में तारपीन का तेल 50 से 60 मी.ली. लीटर मिला कर पिलाएं। • हींग और लाल मिर्च पाउडर छाछ में मिला कर पिलाने से पशुओं को राहत मिलेगी। • मिटटी के तेल में सूती कपड़े को भिगोकर उसे सुघाएं। • ज्यादा होने पर पतली सुई द्वारा पेट की गैस बहार निकालें (यह कार्य सावधानी पूर्वक करना चाहिए पूरी जानकारी नहीं होने पर न करें) कब्ज पशु भोजन को ठीक से पचा नहीं पाता है, खुराक आंत से आगे नहीं जाने के कारण पशु गोबर नहीं कर सकते। उपाय • 250 ग्राम बिलायती नमक (मैग्नीशियम सल्फेट) को पानी में घोलकर तुरंत पशु को दें। • खाद्य तेल 1 लीटर या अरंडी का तेल 350 मिली नाल के माध्यम से पशु को पिलाने से राहत मिलती है। • यदि नवजात शिशु को दस्त की समस्या है तो ताजी छाछ में संचर डालकर पिलाएं। संदर्भ: पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग: जूनागढ़
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