पशुपालनपशु चिकित्सक
बाईपास प्रोटीन एक महत्वपूर्ण पशु आहार
दुग्ध उत्पादक पशुओं के पेट में चार कंपार्टमेंट होते हैं। पहला और सबसे महत्वपूर्ण 'रुमेन' है, जहाँ चारा और भूसे का अधिकांश किण्वीकरण होता है। जब हम इन पशुओं को प्रोटीन की खली/मील देते हैं, तब रुमेन मे जीवाणुओं द्वारा प्रोटीन का अधिकांश भाग (60-70%) अमोनिया मे परिवर्तित हो जाता है। इस प्रकार खली का एक महत्वपूर्ण भाग जो पशु आहार का सबसे अधिक महंगा हिस्सा होता है, बर्बाद हो जाता है। यदि हम इन प्रोटीन की खलियों को उपयुक्त रासायनिक उपचार करें तो, रूमेन में इनका किण्वन कम किया जा सकता है। यह प्रक्रिया/उपचार, जो रूमेन मे खली के प्रोटीन का किण्वन होने से रक्षा करते हैं, इस तकनीक को बाईपास प्रोटीन तकनीक कहते हैं।
बाईपास प्रोटीन की आवश्यकता कब होती है? • तेजी से बढ़ने वाले बछड़े के लिए • जब पशु का दूध उत्पादन 12-15 लीटर से अधिक हो • पशु को अच्छी गुणवत्ता की तुलना में कम गुणवत्ता वाला चारा देते हैं तब बाईपास प्रोटीन देने की विधि: • पशु के विभिन्न शारीरिक चरणों के अनुसार, पशु की खुराक में प्रोटीन का प्रमाण 14 से 20 प्रतिशत होना चाहिए। • पशु की कुल प्रोटीन की आवश्यकता का कम से कम 40 प्रतिशत प्रोटीन पशु को इस तैयार बाईपास प्रोटीन के रूप में प्राप्त होना जरुरी है। • जब बाईपास प्रोटीन उपलब्ध नहीं होता है, तब पशु को कपास की खली, राइस ब्रान, मक्के का भूसा इत्यादि में बायपास प्रोटीन ज्यादा होने से इस प्रकार की खुराक पशु को आहार में दिया जा सकता हैं । बाईपास प्रोटीन के लाभ: • शरीर की वृद्धि और उत्पादन के लिए बहुत उपयोगी। • बाईपास प्रोटीन प्रदान करने से दूध का उत्पादन बढ़ता है, औसत विकास दर बढ़ती है, दूध वसा और प्रोटीन प्रतिशत बढ़ता है। स्रोत – एग्रोस्टार पशु विशेषज्ञ यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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