कृषि वार्ताआउटलुक एग्रीकल्चर
ईरान और सऊदी से बासमती चावल की मांग कम हुई
उत्पादक राज्यों की मंडियों में बासमती धान की नई फसल की आवक शुरू हो चुकी है, लेकिन ईरान और सऊदी अरब से बासमती चावल की मांग कम है। इसका असर बासमती धान की कीमतों पर पड़ेगा। एपीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ईरान में भारत के चावल निर्यातकों का पैसा अभी तक फंसा हुआ है, जिस कारण भारतीय निर्यातक भी नए निर्यात सौदे नहीं कर रहे हैं। हालांकि अक्टूबर में ईरान की आयात मांग कम रहती है। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2019-20 के पहले पांच महीनों, अप्रैल से अगस्त के दौरान बासमती चावल के निर्यात में 10.27 फीसदी की गिरावट आई है। कुल निर्यात 16.6 लाख टन का ही हुआ है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 18.5 लाख टन का निर्यात हुआ था। हालांकि बासमती चावल में घरेलू मांग लगातार बढ़ रही है। चालू सीजन में धान का उत्पादन ज्यादा ही होने का अनुमान है।
ईरान, भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा आयातक है। एपीडा के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में ईरान ने भारत से 10,790 करोड़ रुपये का 14.83 लाख टन बासमती चावल आयात किया था। वित्त वर्ष 2018-19 में देश से बासमती चावल का कुल निर्यात 44.14 लाख टन का 32,804 करोड़ रुपये का हुआ था। स्रोत – आउटलुक एग्रीकल्चर, 5 अक्टूबर 2019 यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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