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पशुपालक कैलेंडर: नवंबर में ध्यान देने वाली बातें
इस मौसम में ठंड की शुरुआत हो जाती है, जिससे पशुपालक को अपने पशु के प्रति कुछ खास बातों का ध्यान देना पड़ता है। तो चलिए जानते हैं, इस महीने में ध्यान देने वाली बातें।
• इस माह में तापमान अचानक कम होने की स्थिति में पशुओं को सर्दी से बचाने के उपाय करें, रात में पशुओं को खुले में ना बांधे। • पशुओं का फर्श सूखा होना चाहिए । • मुंहपका-खुरपका (Foot and Mouth Disease) रोग, गलघोंटू (Haemorrhagic Septicaemia), भेड़/बकरी चेचक (Sheep Goat Pox), ठप्पा (Black Quarter), फड़किया (Enterotoxemia) रोग आदि के टीके यदि अभी भी नहीं लगवाएं हों, तो कृप्या समय रहते लगवा लें । • थनैला mastitis रोग से बचाव के उपाय करें । • परजीवीनाशक दवा या घोल देने से पशुओं को परजीवी प्रकोप से बचाया जा सकता है, जिससे ना केवल पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा। बल्कि जो भोजन पशु खाता है उसका शरीर में सदुपयोग होगा तथा दूध उत्पादन बढ़ेगा। • पशुओं को लवण-मिश्रण निर्धारित मात्रा में दें। • चारे की सही समय पर खरीद व संग्रहण पर पूरा ध्यान दें। • बहुऋतुजीवी घासों की कटाई कर लें। इसके बाद ये सुप्तावस्था में चली जाती हैं, जिससे अगली कटाई तापमान बढ़ने पर फरवरी-मार्च में ही प्राप्त होती है। • तीन वर्ष में एक बार पी.पी.आर का टीका भेड़ और बकरियों में अवश्य लगवाएं। • भेड़ के शरीर से उन कतरने के 21 दिन बाद बाह्य परजीवीयों से बचने के लिए कीटाणुनाशक घोल से नहलाएं। स्रोत : NDDB यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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