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पशुपालक कैलेंडर: दिसंबर में ध्यान देने वाली बातें
• पशुओं के लिए सर्दी से बचाव का उचित प्रबन्ध करें । • रात में पशुओं को अंदर गर्मी वाले स्थान पर बांधें। • मुंहपका - खुरपका रोग , गलघोंट्र, चेचक, फड़किया रोग आदि के टीके यदि अभी भी नहीं लगवाए हों , तो कृपया समय रहते लगवा लें । • पशुओं को खनिज तत्व -मिश्रण निर्धारित मात्रा में मिलाकर दें ।
• दुधारु पशुओं को थनैला रोग से बचाने के लिए पूरा दूध निकालें और दुध दोहने के बाद थनों को कीटाणुनाशक घोल से धो लें। _x000D_ • पशु आहार में हरे चारे की मात्रा नियंत्रित ही रखें व सूखे चारे की मात्रा बढ़ा कर दें। क्योंकि हरे चारे को अधिक मात्रा में खाने से पशुओं में दस्त इत्यादी की समस्या हो सकती है। _x000D_ • पशुओं को खिलाने के अतिरिक्त हरा चारा बचा हुआ हो, तो उसे छाया में सुखाकर सूखी घास के रुप में संरक्षित करें। _x000D_ _x000D_ स्रोत: NDDB_x000D_
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