सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
प्याज की फसल में आर्द्रगलन (डैम्पिंग ऑफ) का नियंत्रण!
यह बीमारी प्रायः हर जगह जहां प्याज की पौध उगायी जाती है, मिलती है व मुख्य रूप से पीथियम, फ्यूजेरियम तथा राइजोक्टोनिया कवकों द्वारा होती है। इस बीमारी का प्रकोप खरीफ मौसम में ज्यादा होता है क्योंकि उस समय तापमान तथा आर्दता ज्यादा होते । यह रोग दो अवस्थाओं में होता है: बीज में अंकुर निकलने के तुरन्त बाद, उसमें सड़न रोग लग जाता है जिससे पौध जमीन से ऊपर आने से पहले ही मर जाती है। बीज अंकुरण के 10-15 दिन बाद जब पौध जमीन की सतह से उपर निकल आती है तो इस रोग का प्रकोप दिखता है। पौध के जमीन की सतह पर लगे हुए स्थान पर सड़न दिखाई देती है और आगे पौध उसी सतह से गिरकर मर जाती है। आर्द्रगल की रोकथाम - 1. बुवाई के लिए स्वस्थ बीज का चुनाव करना चाहिए। 2. बुवाई से पूर्व बीज को थाइरम या कैप्टान @ 0.3% ग्राम प्रति कि.ग्रा बीज की दर से उपचारित करें। 3. पौध शैय्या के उपरी भाग की मृदा में थाइरम के घोल (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) या बाविस्टीन के घोल (1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी) से 15 दिन के 4. अन्तराल पर छिड़काव करना चाहिए। 5. कैप्टन या थिरम से 0.2% या कार्बेन्डाजिम @ 0.1% या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड @ 0.3% के द्वारा ड्रेंचिंग करें। 6. पानी का प्रयोग कम करना चाहिए। खरीफ मौसम में पौधशाला की क्यारियां जमीन की सतह से उठी हुई बनायें जिससे कि पानी इकट्ठा न हो।
स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनॉमी सेंटर एक्सीलेंस, प्रिय किसान भाइयों दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक👍🏻करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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