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चना में हानि कारक कटुआ कीट का नियंत्रण!
कटुआ अथवा कट वर्म कई क्षेत्रों में चना की फसल को हानि पहुँचाता है। इस कीट का प्रकोप प्रायः उन क्षेत्रों में विशेष रुप से होता है। जहां बुवाई से पूर्व बरसात का पानी भरा रहता है। इस कीट की इल्लियां देखने में हल्के स्याह या गहरे भूरे रंग की तैलीय होती है जो ढे़लों के नीचे छिपी रहती है और रात को बाहर निकल कर पौधों को उगते ही जमीन की सतह से काट देती हैं। इस कीट का आक्रमण पौधे के बडे़ होने पर भी जारी रहता है। इल्लियां पौधे को काटने के उपरान्त थोड़ी दूर खींचकर जमीन में खड़ा गाढ़कर छोड़ देती हैं। इस प्रकार की बिखरी, मुरझायी हुई टहनियों या तनों को देखकर कटुआ कीट की उपस्थिति का ज्ञान आसानी से हो जाता है। कटुआ कीट के नियंत्रण का प्रबंधन:- 1. ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई करें। 2. क्लोरीपायरीफास 20 ई.सी. की 1.0 लीटर मात्रा प्रति 100 कि.ग्रा. बीज की दर से बीज शोधन करें। 3. जुताई के समय क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किग्रा. प्रति हेक्टेयर की दर से आखिरी जुताई से पूर्व भुरक कर भूमि में मिलाएँ। 4. खड़ी फसल में 0.05 प्रतिशत क्लोरीपायरीफास के घोल को पौधों की जड़ों के पास छिड़काव करना चाहिए। 5. खेत में जगह-जगह सूखी घास के छोट-छोटे ढेर को रख देने से दिन में कटुआ कीट की सूँडिया छिप जाती है। जिसे प्रातःकाल इकट्ठा कर नष्ट कर देना चाहिए।
स्रोत:- IIPR, प्रिय किसान भाइयों दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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