सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
आइये जानते हैं, आलू की चिप्स वाली किस्में!
किसान भाई यदि बड़े स्थर पर व्यावसायिक खेती करना चाहते हैं, साथ ही इस खेती से अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो इसके लिए किसान भाइयों को डिमांड के अनुसार चिप्स वाली निम्न किस्मों में से किसी एक किस्म का चयन करना चाहिए। कुफरी चिप्सोना 1:- पिछेती अवस्था में लगने वाली सूखे की बीमारी इस किस्म को प्रभावित नहीं करती। इसकी औसतन उपज 170—180 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म चिप्स बनाने के लिए उपयुक्त है। कुफरी चिप्सोना 3:- इस किस्म के कंद सफेद क्रीमी, अंडाकार, सतही आँखों वाले तथा सफेद गुदा वाले होते है। फसल 110–120 दिनों में तैयार हो जाती है | इसकी पैदावार लगभग 300 से 350 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक है। यह किस्म पछेती झुलसा रोग प्रतिरोधी है। इसकी भंडारण क्षमता अच्छी है। इस किस्म के कंद चिप्स बनाने के लिए उपयुक्त है। कुफरी हिमसोना:- इस किस्म के कंद सफेद–क्रीमी, गोला–अंडाकार, सतही आँखों वाले तथा गुदा क्रीमी होता है। फसल 120 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है। यह किस्म देश के पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग 15–20 क्विंटल प्रति हैक्टेयर पैदावार देती है। मैदानी क्षेत्रों में इस किस्म से लगभग 300–350 क्विंटल उपज प्राप्त की जा सकती है। यह किस्म पिछेती झुलसा रोग की मध्यम प्रतिरोधी है। इसकी भंडारण क्षमता अच्छी है। इस किस्म के कंद चिप्स तथा लच्छा बनाने के लिए उपयुक्त है। कुफरी चिप्सोना 4:- इस किस्म के कंद सफेद – क्रीमी, गोला अंडाकार, सतही आँखों वाले तथा गूदा सफेद होता है। फसल 100 -110 दिनों में तैयार हो जाती है। देश के मैदानी इलाकों में लगभग 300 - 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उफ देती है। यह अपने गोल - अंडाकार कंद, शुष्क पदार्थ कि मात्रा और कम अवकारक शकरा के कारण चिप्स बनाने के लिए उपयुक्त है। जहाँ प्रसंस्करण के लिए उच्च कंद उपज और उच्च स्तर की पिछेता झुलसा रोग प्रतिरोधिता के संयोजन की आवश्यकता होती है। अच्छी भंडारण क्षमता से इस किस्म को लंबी अवधि के लिए रखने में मदद मिलती है और इस तरह कच्चे की वर्षभर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
स्रोत:-एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस , प्रिय किसान भाइयों दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद।
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