कृषी वार्तापत्रिका
राजकीय वृक्ष खेजड़ी की नई वैरायटी मिली, सांगरी भी स्वादिष्ट!
जोधपुर. बीकानेर स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर एरिड हॉर्टिकल्चर ने खेजड़ी की नई वैरायटी खोजी है जो कांटे रहित है। अब इसका उत्पादन और खेत में विभिन्न फसलों के बीच परीक्षण जोधपुर स्थित केंद्रीय रुक्ष क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) में किया जा रहा है। यह खेजड़ी कांटे रहित है। इसमें दो साल बाद ही सांगरी आ जाती है जो परंपरागत खेजड़ी से अधिक स्वादिष्ट एवं पौष्टिक है। नई सांगरी में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक पाई गई है। इसकी पत्तियां भी घनी हैं जो जानवरों के लिए बेहतर चारा बनती है। सामान्यत: कांटे वाले खेजड़ी का पेड़ 10 से 12 फीट का होता है जिस पर चढकऱ पर सांगरी तोडऩी पड़ती है लेकिन कांटे रहित खेजड़ी का पौधा 5-6 फीट का ही रहता है। इंसान खड़े-खड़े ही सांगरी तोड़ सकता है। नई खेजड़ी का नाम नहीं बदलेगा खेजड़ी की नई मिली वैरायटी की स्पीशीज नहीं बदली है इसलिए इसका नाम भी खेजड़ी यानी प्रोसोपिस सिनेरिया ही रहेगा जो कि राजस्थान का राज्य वृक्ष भी है। किसानों को भी वितरित करेंगे खेजड़ी हम लोग विभिन्न फसलों के बीच कांटे रहित खेजड़ी का परीक्षण कर रहे हैं। खेजड़ी को उगाकर हम किसानों को भी वितरित करेंगे ताकि वे अपने खेत में इसे लगा सकें। स्रोत:- पत्रिका, 10 सितंबर 2020, प्रिय किसान भाइयों यदि आपको दी गयी जानकारी उपयोगी लगी तो इसे लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ जरूर शेयर करें धन्यवाद।
31
5
संबंधित लेख