सलाहकार लेखNRCP
अनार की फसल में उकटा रोग का नियंत्रण!
इस रोग के संक्रमण से पौधे की एक या अधिक टहनियाँ, पौधे का उपरी हिस्सा (पत्तीयाँ) पुरी तरह से सुख कर झड़ जाती है। पौधे की पत्तिया एवं शाखाएँ मुरझाकर सुखने लगती हैं। रोग का नियंत्रण यह रोग, फफूंदी या जड़ों में कीट आदि के कारण हो तो तुरंत क्लोरोपायरीफॉस 20 ई. सी. (2.5 से 4 मिली/1 लीटर) + कार्बेन्डाझीम 50 डब्लु. पी. (2 ग्रा/1 लीटर) इस दवाइयों के 5 से 8 लीटर के घोल को जड़ो के नजदिक डाले। संक्रमित पौधो को और नजदीक पौधो को भी उपर दिए घोल से 20 दिनों के अंतराल में 3 से 4 बार इस तरह का ड्रेचिंग करें। पुरे बगिचे को उसके चारो और सिंचाई के द्वारा उपर दिये गई दवाईया 3-4 माह के अंतराल से दे। तने पर छेद बनाने वालो कीटों का संक्रमण दिखने पर लाल मिट्टी/गेरू (4 किलो) + क्लोरोपायरीफॉस 20 ई. सी (20 मि.ली.) + लिंडेन (25 ग्राम) + कॉपर ऑक्सिक्लोराइड (25 ग्राम) का मिश्रण 10 लीटर पानी में लेकर पेस्ट बनाए तनों को जमिन से 2 फीट तक उपरी हिस्से में लगाए। उकटा रोग अगर निमेटोड के कारण होता हैं पेड़ के जड़ों की उपरी हिस्से की मिट्टी निकालकर उसमें फोरेट 10 जी (10-20 ग्राम/पौधा) की लागत से या कार्बोफ्युरॉन 3 जी (20 से 40 ग्रा/पौधा) की लागत से गोल रिंग करके डाले बाद में उसे मिट्टी से ढके। दो पौधो के बीच की जगह में या हे एक पौधे के नजदीक अफ्रीकन गेंदे का पौधा लगाए। इससे निमेटोड की संख्या कमी पायी जाती हैं। अगर गेंदे के पौधे 4 से 5 माह तक वैसे ही रहने दें तो निमेटोड के नियंत्रण में सुधार आता हैं।
स्रोत:- NRCP, प्रिय किसान भाइयों दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
16
3
संबंधित लेख