कृषि वार्ताकृषक जगत
महिंद्रा एंड महिंद्रा ने प्‍लांटिंग मास्‍टर पोटैटो+ लॉन्च किया !
महिंद्रा एंड महिंद्रा लि. द्वारा नया एडवांस्डध प्रेसिजन पोटैटो प्लांटिंग मशीनरी, ‘प्‍लांटिंग मास्‍टर पोटैटो+’ लॉन्च किया गया। पोटैटो मशीनरी में दुनिया में अग्रणी, डीवुल्फव के सहयोग से डिजाइन एवं तैयार किये गये, प्‍लांटिंग मास्‍टर पोटैटो + को भारतीय कृषि स्थितियों को ध्याान में रखते हुए विकसित किया गया है. महिंद्रा और डीवुल्फ ने वर्ष 2019 में पंजाब के प्रगतिशील किसानों को नई प्रेसिजन पोटैटो प्लांडटर टेक्नोललॉजी उपलब्ध् करायी। इन किसानों ने परंपरागत विधियों के मुकाबले इस नये सिस्ट म का उपयोग करने के बाद से पैदावार में 20-25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करायी। महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट सेक्‍टर के प्रेसिडेंट, श्री हेमंत सिक्‍का ने बताया, ”दुनिया के दूसरे सबसे बड़े आलू उत्पािदक देश के रूप में, आलू की उच्च पैदावार और बेहतर गुणवत्तार के लिए एडवांस्डव फार्म मशीनरी आवश्यटक है। ‘प्‍लांटिंग मास्‍टर पोटैटो +’ के जरिए, हम भारतीय किसानों के लिए यह तकनीक ला रहे हैं ताकि आलू की खेती की पैदावार व गुणवत्ताश बेहतर हो सके। इस प्रोडक्टह को लॉन्च करने के साथ, कुछ बाजारों में किराये पर भी यह उपलब्धर है, साथ ही फाइनेंस सुविधा भी मौजूद है, ताकि किसानों को यह तकनीक आसानी से उपलब्ध हो सके।” भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पा,दक देश है, लेकिन यह उत्पादकता के मामले में पीछे है। भारत में प्रति एकड़ पैदावार 8.5 टन है, जबकि नीदरलैंड्स में यह 17 टन है। फसल के पैदावार के स्तमर के निर्धारण में कई तत्वों की भूमिका होती है। उचित कृषि तकनीक का उपयोग उनमें से एक अधिक महत्वनपूर्ण कारक है। नया प्लांएटिंग मास्ट्र पोटैटो + पंजाब में बिक्री के लिए और उत्ततर प्रदेश में बिक्री और किराये दोनों के लिए है .वहीँ गुजरात में केवल किराये पर उपलब्ध होगा। प्‍लांटिंगमास्‍टर पोटैटो + के विषय में जहां भारत में आलू की खेती बड़े पैमाने पर परंपरागत तरीकों से की जाती है, वहीं खेती के तरीकों में भी कई खामियां हैं। हाथ से की गई रोपाई उनमें से ही एक खामी है और इसके लिए बहुत अधिक मेहनत भी करना पड़ता है। प्‍लांटिंगमास्‍टर पोटैटो + प्रेसिजन पोटैटो प्लांअटर है। यह उच्च स्त र का सिंग्यूालेशन सुनिश्चित करता है और इसमें आलू का एक भी बीज बेकार नहीं जाता है। (सिंग्यूसलेशन का अर्थ है, एक जगह पर आलू के केवल एक बीज को डाला जाता है और इसमें एक जगह पर कभी भी दो बीज नहीं पड़ते हैं)। इसके अलावा, यह प्लां टर सुनिश्चित करता है कि आलू की बुवाई सटीक तरीके से हो, ताकि एक समान गहराई और दो बीजों के बीच एकसमान दूरी सुनिश्चित की जा सके। बुवाई किये गये आलू से बनी मेड़ पर मिट्टी के संघनन का स्तसर सही हो। इससे प्रत्ये क पौधे को पर्याप्ती पानी, सूर्य का प्रकाश और उसके प्रत्ये क ट्यूबर के बढ़ने के लिए भरपूर जगह मिलेगी, जिससे कि आलू की बेहतर गुणवत्ता के साथ उसका उत्पाकदकता भी बढ़ सके। प्लांपटर को साबूत आलू के लिए, कटे आलू के लिए, स्ट्रेतट लाइन प्लांबटिंग या जिगजैग प्लांशटिंग और अलग-अलग गहराई में प्लां टिंग के लिए एडजस्ट किया जा सकता है।
स्रोत:-कृषक जगत ,  यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो इसे  लाइक करें तथा अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद।
33
3
संबंधित लेख