सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
अनार की फसल में सूत्रकृमि का नियंत्रण!
राजस्थान में अनार लगाने लगाने वाले किसानों को पौधे पीले पड़ने की समस्या दिखाई दे रही है। अनार के पौधों में विभिन्न कीट और रोगों के कारण नुकसान होता है। पौधों के सूखने के साथ आँखों से ना दिखाई देने वाले सूत्रकृमि का प्रकोप अनार में ज्यादा प्रमाण में दिखाई दे जा रहा है। इसलिए सूत्रकृमि का समय पर नियंत्रण करना आवश्यक है। अनार में सूत्रकृमि के नियंत्रण के लिए निम्न उपाय अपनाने चाहिए - 1. कलम बनाते समय सुत्रकृमीयुक्त मिट्टी का उपयोग न करें। 2. अनार के पौधे लगाने से पहले 1 से 2 साल तक जमीन में सब्जियाँ और दलहनी फसल नहीं लगाई गयी होना चाहिए। 3. अनार की बुवाई से करने से पहले मिट्टी की 2 से 3 बार गहरी जुताई करके गर्मियों में मिट्टी को तपने दें। 4. अनार की कलम लगाते समय, गड्डे में नीम की खली का उपयोग करें। 5. अनार में टमाटर, बैंगन, मिर्च, भिंडी, खीरा आदि अंतर फसल न लगाएं। 6. अनार में बहार लेते समय, ज़मीन में पेड़ की जड़ में 1 से 1.5 किलो प्रति पौधा नीम की खली का उपयोग करें। 7. सूत्रकृमि के नियंत्रण के लिए जैविक उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। उदाहरण के लिए। पैसीलोमैक्सिस, ट्राइकोडर्मा प्लस, स्यूडोमोनास के उपयोग को सूत्र द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।
स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, प्रिय किसान भाइयों दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद।
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