सलाहकार लेखउत्तर प्रदेश कृषि विभाग
जानिए फसलों में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन!
किसान भाइयों प्रत्येक किसान यह अपेक्षा करता है कि उसकी जोत के सम्पूर्ण क्षेत्र में अच्छी गुणवत्ता वाली अधिक से अधिक उपज प्राप्त हो। इसके लिए आवश्यक है कि मृदा उर्वरता का संतुलन इस प्रकार किया जाय कि फसल की मांग एवं आवश्यकता के अनुसार पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध होते रहें, जिससे अधिक से अधिक उपज मिल सके और मृदा स्वस्थ्य सुरक्षित बना रहे। इसके लिए आवश्यकतानुसार अकार्बनिक एवं कार्बनिक माध्यमों से पर्याप्त मात्रा में  आवश्यक है। क्योंकि प्रत्येक तत्व का पौधों के अन्दर अलग-अलग कार्य एवं महत्व है जो विभिन्न अवस्थाओं में पूर्ण होता है। यह संतुलन बिगड़ने पर उत्पादन सीधे प्रभावित होता है। इस व्यवस्था/ तकनीकी को एकीकृत पोषक तत्व प्रबन्धन की संज्ञा दी गई है। एकीकृत पोषक तत्व प्रबन्धन के घटकजैविक खाद/ उर्वरकफसल अवशेषजीवाणु खादरसायनिक खाद कृषि में एकीकृत तत्व प्रबन्धन से लाभअधिकतम पैदावार प्राप्त करना।पोषक तत्वों को बर्बादी से बचाना।विषैलापन तथा प्रतिक्रियाओं से बचाना, किसी एक तत्व की अधिकता भी विषैलापन पैदा करती है।मृदा की उत्पादकता एवं स्वास्थ्य बनाये रखना।गुणात्मक उत्पादन।वातावरण की विपरीत परिस्थितियों से बचाव।कीड़े मकोड़ों के प्रभाव को प्राकृतिक तौर पर कम करना।लाभ/लागत अनुपात में वृद्धि। एकीकृत पोषक तत्व प्रबन्धन हेतु कुछ सुझावमिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों एवं जैविक खादों का प्रयोग करें।दलहनी फसलों में राइजोबियम कल्चर का प्रयोग अवश्य करें।धान व गेहूं के फसल चक्र में ढैंचे की हरी खाद का प्रयोग करें।फसल चक्र में परिवर्तन करें।आवश्यकतानुसार उपलब्धता के आधार पर गोबर तथा कूड़ा करकट का प्रयोग कर कम्पोस्ट बनाई जाये।खेत में फसलावशिष्ट जैविक पदार्थों को मिट्टी में मिला दिया जाय।विभिन्न प्रकार के जैव उर्वरकों तथा नत्रजनिक संस्लेषी, फास्फेट को घुलनशील बनाने वाले बैक्टीरियल अल्गन तथा फंगल बायोफर्टिलाइजर का प्रयोग करें।कार्बनिक पदार्थ तथा अकार्बनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें।
स्रोत- उत्तर  कृषि विभाग प्रिय, किसान भाइयों  यदि दी गयी जानकारी उपयोगी लगी तो इसे लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों  के साथ शेयर करें धन्यवाद।   
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